सिसाना-सिलाना मार्ग के चौड़ीकरण के समय किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था, परंतु उन्हें अब तक मुआवजा नहीं दिया गया। इसके विरोध में एसडीएम कार्यालय के सामने रविंद्र जठेड़ी 133 दिन से आमरण-अनशन पर बैठे हैं। रविवार को किसानों ने एसडीएम कार्यालय के सामने खरखौदा-सोनिपत मार्ग को अवरुद्ध कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुआवजे की मांग की।
पंद्रह मिनट के सांकेतिक जाम से पहले धरनास्थल पर यज्ञ किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सवा बारह बजे सड़क पर उतर आए और खरखौदा-सोनीपत मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना मिलते ही पुलिसबल जाम स्थल पर पहुंच गया और वाहनों को अन्य रास्ते से डायवर्ट किया।
लोगों ने पंद्रह मिनट के बाद जाम को खोल दिया। जाम खुलने के बाद तहसीलदार शिव कुमार सैनी धरनास्थल पर पहुंचे। किसानों ने उनसे कहा कि मुआवजे को लेकर 1 नवंबर 2013 से सत्याग्रह किया जा रहा है।
किसानों का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय जातिगत आरक्षण विरोधी पार्टी के महासचिव रविन्द्र जठेड़ी ने 16 दिसम्बर 2013 सेे एसडीएम कार्यालय के बाहर आमरण-अनशन पर हैं। पीड़ित किसानों ने बताया कि वे उपायुक्त, विधायक और मुख्यमंत्री को अपना मांग पत्र भेज चुके हैं, परन्तु अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया है। जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।
किसानों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि समय रहते अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो अगली बार जो जाम लगाया जाएगा, वह अनिश्चितकालीन होगा।
इस समय लोग गेहूं की कटाई में लगे हुए हैं। यही कारण है कि यह जाम सिर्फ प्रशासन को चेतावनी देने के लिए लगाया गया। तहसीलदार शिवकुमार सैनी ने कहा कि अगर मुआवजा देने संबंधी कार्रवाई पहले से अमल में लायी जा रही है तो उन्हें मुआवजा मिल जाएगा, अगर ऐसा नहीं हुआ है तो 16 मई को आचार संहिता हटने के बाद ही सरकार के पास मांगों को भेजा जाएगा। सरकार ही अंतिम निर्णय लेगी।
प्रदर्शनकारियों में अनूप सिंह,नरेश ठेकेदार, राजकुमार पहलवान, रामचन्द्र, देवेन्द्र, बलजीत, संदीप पहलवान, सुनीता, किताबो, महेन्द्रो, प्यारी व कमला आदि के नाम शामिल हैं।