प्रदेश में कोई भी किसान साठी धान की रोपाई करता है तो कृषि विभाग न केवल उस पर कानूनी कार्रवाई करेगा, बल्कि किसान का ट्यूबेल कर कनेक्शन भी काट दिया जाएगा।
जिले में लगातार गिरते भू जलस्तर को देखते हुए कृषि विभाग ने यह निर्णय लिया है। यह आदेश कृषि विभाग हरियाणा के महानिदेशक कार्यालय द्वारा जारी किया गया है।
फतेहाबाद जैसे जिले में किसान गेहूं की फसल काटने के बाद धान की रोपाई कर देते थे। इसे साठी किस्म का धान बोलते हैं जो 60 दिनों में पककर तैयार हो जाता है।
उसके बाद किसान तीसरी फसल की बुआई भी कर देता था। लेकिन साठी धान में अत्याधिक पानी का दोहन हो रहा था। जिसके कारण क्षेत्र का भू जलस्तर गिरता चला गया।
सरकार ने पानी संकट से बचने के लिए साठीधान की रोपाई पर ही प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन किसान ज्यादा कमाई के लालच में इस प्रतिबंध को कोई ज्यादा तव्वजो नहीं दे रहे थे।
अब सरकार ने निर्णय लिया है कि जो भी किसान 15 मई से पूर्व पनीरी की रोपाई व 15 जून के बाद साठी धान की रोपाई की तो उस किसान पर कानूनी कार्रवाई के साथ उसका ट्यूबवेल का कनेक्शन काट दिया जाएगा।
पहले तो कनेक्शन अस्थाई रूप से काटा जाएगा लेकिन बाद में स्थाई रूप से काट दिया जाएगा। कृषि उपनिदेशक डॉ. अनूप सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि साठी धान के लिए अत्यधिक पानी की जरूरत होती है,
क्योंकि यह मानसून से पूर्व रोपा जाता है। ऐसे में 1 किलो चावल पर 4500 लीटर पानी की खपत होती है। प्रदेश सरकार ने किसानों को हिदायत दी है कि वह साठी धान की रोपाई न करें नहीं तो कृषि विभाग उसे उखाड़ देगा।
मालूम हो कि पिछले दिनों घग्घर के तटवर्तीय क्षेत्रों में बसे किसानों ने उपायुक्त से मिलकर मांग की थी कि गेहूं के बाद उन्हें धान की बिजाई करने की अनुमति दी जाए।