पीजीआई के वार्ड-15 के आईसीयू में भर्ती नवजात की हालत में सुधार आ रहा है।
यहां से दो दिन बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
हालांकि बच्चे का दो और ऑपरेशन होना है। बच्चे की देखभाल में जुटे जनसेवा संस्थान के कर्मियों का कहना है कि बगैर प्रशासनिक मंजूरी के बच्चे को संस्था में नहीं रखा जा सकता है।
ऐसे में मासूम के लिए एक अदद छत की तलाश शुरू कर दी गई है।
गुड़गांव के खांडा रोड पर मिले नवजात का ऑपरेशन कर अस्थाई मलद्वार बनाने के बाद उसकी हालत में सुधार आने लगा है। बृहस्पतिवार को उसने आम बच्चों की तरह मूवमेंट की।
बच्चे का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. के.एन. रतन ने बताया, बच्चे का तीन माह बाद दूसरा ऑपरेशन किया जाएगा। यह ऑपरेशन मलद्वार सही जगह बनाने के लिए होगा।
इसके दो माह बाद पेट के जरिये बनाया गया अस्थाई मलद्वार बंद करने के लिए दो माह बाद फिर ऑपरेशन होगा। फिलहाल शनिवार या रविवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
सीडीपीओ को लिखेंगे पत्र
सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर हुक्कू ने बताया कि अस्पताल में बच्चों की संख्या पहले ही क्षमता से ज्यादा है। ऐसे में उसे यहां नहीं रखा जा सकता। यहां से छुट्टी मिलने के बाद भी बच्चे को मेडिकल केयर की जरूरत पड़ेगी। जनसेवा संस्थान के संचालक स्वामी परम चैतन्य से बात की गई है। लेकिन प्रशासन की मंजूरी मिले बिना बच्चे को जनसेवा संस्थान में भी नहीं रखा जा सकता है। बच्चे के संबंध में दिशा निर्देश जारी करने को सीडीपीओ को पत्र लिखेंगे।