एमडीयू में परीक्षा प्रणाली में सुधार की कवायद शुरू हो गई है।
सेमेस्टर परीक्षा में मूल्यांकन संबंधित जरूरी दिशा-निर्देशों को लेकर सोमवार को एमडीयू से संबद्ध 25 डिग्री कॉलेजों और 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक हुई।
वीसी और रजिस्ट्रार ने प्राचार्यों को निर्देश दिए कि लेक्चरर को समझाएं कि वह उत्तरपुस्तिका पर घुग्गी न मारकर अपने नाम का पूरा हस्ताक्षर करें। यदि किसी प्रश्न के उत्तर में जीरो अंक दिए जाते हैं तो उत्तर पुस्तिका पर उसका कारण भी लिखना होगा। नए आदेशों के तहत संबंधित सेंटर के सभी लेक्चरर्स के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करनी जरूरी है। खाली पेज पर लाल कलम में क्रॉस का निशान लगाना होगा ताकि बाद में गड़बड़ी की आशंका न रहे।
मुख्य परीक्षक दोबारा से कॉपियों की जांच
एमडीयू वीसी एच. एस. चहल ने कहा कि मूल्यांकन का काम केवल ऐसे प्राध्यापकों से करवाया जाए, जिनके पास इस विषय का न्यूनतम 3 वर्ष का अध्यापन का अनुभव है। प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर एक मुख्य परीक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए। यह मुख्य परीक्षक मूल्यांकन के बाद उत्तर पुस्तिकाओं में से दस प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाएं जांच कर परखेगा कि मूल्यांकन ठीक हुआ है या नहीं। बैठक में कुलसचिव डॉ. एस. पी. वत्स, परीक्षा नियंत्रक डॉ. बी. एस. सिंधु, प्रो. जगदीश नांदल, प्रो. बद्दरूद्दीन, उप कुलसचिव चतर सिंह, जय नारायण शर्मा, सहायक कुलसचिव आर. एस. मलिक, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, प्राचार्य शमशेर सिंह अहलावत, ज्ञानेंद्र सिंह, कृष्णा चौधरी, डॉ. लक्ष्मी बेनीवाल दलाल, ज्योति जुनेजा, मोनिका वर्मा, सतीश आहूजा, एन. के. अरोड़ा, नरेंद्र सिंह मौजूद रहे।