ब्रिटेन में भारतीय और अन्य गैर यूरोपीय संघ के पेशेवरों के मामलों को उठाने वाले एक समूह ने बुधवार को कहा कि प्रवासियों को जितनी ब्रिटेन की जरूरत है उतनी ही ब्रिटेन को प्रवासियों की। गौरतलब है कि विदेशी छात्रों की नीति में बदलाव से यहां उनके हटाए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
शिक्षाविदों एवं उद्योगपतियों द्वारा प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से की गई याचिका में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में आठ अरब वार्षिक का योगदान किया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री इन तर्कों को समझते हैं और निश्चित रूप से वे नीतियों में बदलाव के बारे में विचार कर रहे हैं।
द एचएसएमपी फोरम के कार्यकारी निदेशक अमित कपाड़िया ने कहा कि अगर सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट और कुशल प्रवासियों को गलत संदेश दिया जाता है तो यह दीर्घकाल के लिए ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने जैसा होगा।