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घोस्ट टाउन

Wed, 29 Jan 2014 07:34 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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भले ही चीन बहुत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वहां पर भुतहा शहरों (घोस्ट टाउन) की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। कांगबाशी, निया, टेम्स टाउन आदि चीन के प्रमुख भुतहा शहर हैं।
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भुतहा शहर ऐसे शहरों को कहा जाता है, जो किन्हीं वजहों से वीरान हो गए हों। ऐसे शहरों में खाली मकान एवं टूटी-फूटी आधारभूत संरचनाएं देखने को मिल सकती हैं। किसी भी शहर के भुतहे शहर में तब्दील होने की कई वजहें हो सकती हैं। मसलन, किसी प्राकृतिक संसाधन (सोना, लोहा, कोयला आदि) की खोज होने पर जब उनके खनन का काम चलता है, तो शहर आबाद हो जाता है, लेकिन जब संसाधन खत्म होने पर वहां की आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ जाती हैं, तो शहर वीरान हो जाता है।

इसी तरह, जब कोई आपदा आ जाती है या सरकारी कदमों की वजह से शहर खाली करना पड़ता है या बेलगाम अपराध, युद्ध या परमाणु हादसे जैसी घटनाएं घटती हैं, तो एक जीता-जागता शहर अचानक वीरान हो जाता है। 1948 में खदान में आग लगने के बाद पेनसिल्वेनिया का सेंट्रलिया शहर भुतहे शहर में तब्दील हो गया था। परमाणु ताप संयंत्रों के हादसों के कारण यूक्रेन, बेलारूस एवं जापान में कई शहर वीरान हो गए।
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कभी-कभी ऐसे शहरों को भी भुतहा शहर कहा जाता है, जहां की आबादी कुछ समय पहले तक काफी ज्यादा थी, लेकिन अब भारी बेरोजगारी और उपेक्षा के चलते लोगों का वहां से पलायन हो गया हो। वैसे हाल के दिनों में ऐसे कई भुतहा शहर पर्यटन स्थल बन गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं बन्नाक, मोन्टाना, कैलिको, कैलिफोर्निया, एरिजोना एवं वेस्ट वर्जिनिया आदि। हमारे देश में फतेहपुर सीकरी, मांडु एवं भानगढ़ घोस्ट टाउन माने जाते हैं।
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