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हर लम्हा होती है छेड़छाड़ पर हिम्मत बनाती है जीत का रास्ता

Mon, 01 Dec 2014 02:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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छेड़खानी पर मनचलों को सबक सिखाने वाली बेटियां दूसरी हजारों छात्राओं के लिए आदर्श बन गई हैं।
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हिम्मत वाली बेटियों ने ‘अमर उजाला’ को पीड़ा तो बताई पर हौसले की कहानी भी सुनाई। कहा, हालात कैसे भी हों, हिम्मत हमेशा जीत का रास्ता बनाती है।

कहा, पूरी बस में किसी भी यात्री ने उनकी मदद तक करना उचित नहीं समझा। लड़के खुलेआम इशारे कर रहे थे और गाली दे रहे थे। विरोध किया तो लोगों ने हम दोनों बहनों को ही समझाना शुरू कर दिया कि लड़के हैं, उठा ले जाएंगे, रेप कर देंगे। लड़कों ने मारपीट की तो भी कोई मदद के लिए उठा तक नहीं। बस में कई लड़के तो केवल हंसते ही रहे। लेकिन, उन्होंने मनचलों को सबक सिखाने का फैसला किया और उनसे भिड़ गईं।
हर लम्हा होती है छेड़छाड़
पूजा और आरती का कहना है कि बसों में चढ़ने से लेकर घर पहुंचने तक हर लम्हा छेड़छाड़ होती है। बस जब गांव के अड्डे पर पहुंचती है तो लड़के पहले ही दरवाजे को घेर लेते हैं। कई बार तो लड़कियां चढ़ ही नहीं पातीं। लड़कियों के दो-दो तीन-तीन लेक्चर तक मिस हो जाते हैं। बस में सीट नहीं मिलती है तो लड़के दोनों साइड से घेर कर खड़े हो जाते हैं और कमेंट करते हैं।
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नहीं हुआ बर्दाश्त
पूजा व आरती ने बताया कि वे काफी देर से लड़कों की बदतमीजी बर्दाश्त कर रही थीं, लेकिन हाथ उठाया तो बर्दाश्त नहीं हुआ। ठान लिया कि इन्हें सबक सिखाएंगे। इसी वजह से उन पर बेल्ट से हमला कर दिया।
यात्रियों ने छुड़वा दिया
दोनों बहनों का कहना है कि जब लड़कों ने उन्हें नीचे फेंका तो उन्होंने दो लड़कों को काबू कर लिया था। पूजा ने तो एक ईंट उठाई और उनके सिर पर फेंक मारी। राहगीरों ने लड़कों को पकड़ भी लिया था, लेकिन उन्हें छुड़वा दिया और वे वहां से लड़के खेतों में भाग गए।

रोल मॉडल बन उभरी हैं ये बहनें
लड़कियों को समझना चाहिए कि वे कमजोर नहीं हैं। समाज के ठेकेदारों की सोच ने उन्हें ऐसा बना दिया है। लड़कियां डट कर सामना करेंगी, तभी मनचलों छेड़खानी की घटनाओं पर रोक लगेगी। सोनीपत की ये बहनें हम लड़कियों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरी हैं।
- किरण, वुमेन एक्शन टीम, रोहतक।

बेटियों को करेंगे सम्मानित
बस में बैठे यात्रियों ने कोई पहल नहीं की। जाहिर है कि लोगों की सोच मर चुकी है। दोनों लड़कियों ने मनचलों की घुनाई कर बहुत अच्छा काम किया है और वे शाबाशी के काबिल हैं। पंचायत को भी सच का साथ देना चाहिए। वे तो रोजाना लड़कियों को प्रेरित करने की दिशा में ही काम करती रहती हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटा-बेटी को समान संस्कार व समान शिक्षा दें। बहुत जल्द इन बहादुर बेटियों को सम्मानित किया जाएगा।
-पूनम आर्या, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बेटी बचाओ अभियान।

डीसी को आज सौंपेंगे ज्ञापन
जब लड़कियों को बस से नीचे फेंका गया तो किसी भी यात्री ने विरोध नहीं किया। ये उन लड़कियों के साथ एक अमानवीय व्यवहार है और समिति इसकी कड़ी निंदा करती है। वे सोमवार को डीसी को ज्ञापन देंगी। पंचायत भी न्याय दिलाने की बजाय समझौते का दबाव बना रही है। लड़का एक उच्च परिवार से संबंध रखता है और लड़कियां निमभन। यह बहुत गलत है, पंचायत को तो दोनों बेटियों को शाबाशी देकर उनका साथ देना चाहिए था।
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-अंजू, जिला सचिव, जनवादी महिला समिति।

लड़कों को नैतिकता सिखाएं अभिभावक
यह वारदात नारी को कमजोर समझने वाले समाज के ठेकेदारों पर एक तमाचा है। वह बार-बार यह क्यों भूल जाता है कि नारी एक दुर्गा भी है, जो समय आने पर उनका संहार भी कर सकती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे खासतौर से लड़कों को नैतिकता सिखाएं। उन्हें समझाएं कि जैसे उनके घर में बहनें है, वैसी बाहर भी हैं।
- राकेश, जिला प्रधान, जनवादी महिला समिति।
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