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डॉक्टर खेलते रहे अंताक्षरी, कराहते रहे मरीज, एक और मौत

Wed, 24 Sep 2014 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले चिकित्सकों का दिल नहीं पसीज रहा है।
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में पांच दिन से इलाज न होने से मरीज कराह रहे हैं। वहीं, चीख चीत्कार को अनसुना कर हड़ताली चिकित्सकों ने अंताक्षरी खेली और जमकर फिल्मी गाने गाए।

वहीं, मंगलवार को एक और मरीज ने  इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि चार दिन से कोई संभाल नहीं होने के कारण उनके मरीज की मौत हुई है।

हड़ताल के पांचवें दिन मंगलवार को सभी हड़ताली डॉक्टर सुबह 10 बजे विजय पार्क में आ डटे। नारेबाजी हुई। रणनीति तय हुई और इसके बाद माहौल बदल गया। कुछ हड़तालियों ने कहा कि आज सरकारी छुट्टी है। चिकित्सक वैसे ही काम नहीं कर रहे। ऐसे में कहीं जाने की जरूरत नहीं है। किसी ने कहा कि टाइम पास करने के लिए गाना बजाना हो जाए। हड़ताली ग्रुप में बंट गए और धरना पिकनिक में बदल गया। सिलसिला दोपहर एक बजे तक चला। बीच बीच में भाषणबाजी भी होती रही।
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एचएसएमटी प्रधान से की मुलाकात
कुछ हड़ताली डॉक्टर हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डा. रोहताश कंवर यादव से मिलने पहुंचे। यादव ने कहा कि भले ही उन्हें पीजीआई प्रबंधन ने कमेटी में शामिल कर लिया है, लेकिन एसोसिएशन प्रधान होने के नाते वे उनके साथ हैं। हड़ताल समाप्त करने की भी बात कही तो हड़तालियों ने साफ कहा कि जब तक सभी आरोपियाें को नहीं पकड़ा जाएगा। हड़ताल जारी  रहेगी।
शाम को भी नहीं बनी सहमति
देर शाम को भी चिकित्सकों और प्रबंधन के बीच बैठक हुई। हड़तालियाें ने कहा कि पहले आरोपियों को गिरफ्तार करा दो। उनकी गिरफ्तारी होते ही वे काम पर लौट आएंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह पुलिस का काम है, हमारा नहीं। उनकी बात सुनकर हड़ताली चिकित्सकों का दल वापस लौट आया।
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संभाल होती तो मेरा भाई जिंदा होता
पीजीआई में भर्ती नौरंग (35) ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। नौरंग टोहाना के कंहेड़ी गांव का रहने वाला था। परिजनों का आरोप है कि पांच-छह दिन पहले यहां के वार्ड 17 के कमरा नंबर 9 में उसे दाखिल कराया था। चार दिन से किसी ने नहीं संभाला। जिस कारण आज उसकी मौत हो गई। नौरंग के भाई राजेश का कहना है कि चार दिन से मरीज को केवल एक या दो गोली ही दी जाती थी। कोई बड़ा डॉक्टर जांच के लिए नहीं आया। डॉक्टर्स ने संभाला होता तो शायद आज मेरा भाई जिंदा होता।
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