जाट कॉलेज के खेल विभागाध्यक्ष बलजीत सिंह नांदल की हत्या मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
तीनों आरोपी सतनारायण उर्फ सत्तू, राजबीर और सतपाल बोहर गांव के हैं।
पूछताछ में सामने आया है कि तीनों ने बलजीत की हत्या की साजिश कई दिन पहले ही रची थी। मुख्य साजिशकर्ता जयबीर अभी फरार है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
थाना सिविल लाइन प्रभारी वजीर सिंह रेढू ने बताया कि सूचना मिली थी कि बलजीत सिंह हत्याकांड की साजिश रचने के कुछ आरोपी बोहर गांव के खेतों में छुपे हैं। पुलिस ने दबिश दी और तीनों को वहां से गिरफ्तार कर लिया।
जमीन हथियाने के लिए रची थी साजिश, दी सुपारी
प्रारंभिक पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया कि जमीन हथियाने के लिए उन्होंने बलजीत को ठिकाने लगाने की साजिश रची थी। आरोपियों ने बलजीत की हत्या करने के लिए गांव के ही दो युवकों को प्रवेश और सोनू को तैयार किया। इसमें जयबीर की बुआ का लड़का टैनी निवासी नौगांव, जिला झज्जर भी शामिल हुआ। इन तीनों को हत्या की सुपारी दी गई थी।
रेकी करने के बाद दिया वारदात को अंजाम
सुपारी लेने के बाद तीनों ने बलजीत के लिए रेकी शुरू की। सोमवार को जब बलजीत सिंह घर से शहर आने के लिए निकला, तो तीनों ने दो बाइक से उसका पीछा शुरू किया। सेक्टर-2 पुलिया के पास भीड़ कम देख बलजीत को गोली मार दी।
यह है मामला
जाट कॉलेज में खेल विभागाध्यक्ष बलजीत सिंह नांदल को सोमवार सुबह 11:15 बजे बाइक सवार दो युवकों ने सेक्टर-2 की पुलिया के पास गोली मार दी। नांदल को पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां उसी दिन देर शाम उन्होंने दम तोड़ दिया। हत्या के विरोध में मंगलवार को बोहर के ग्रामीणों ने गांव के पास रोहतक-सोनीपत रोड पर जाम लगा दिया था। वे आरोपियों की गिरफ्तारी और एसपी के मौके पर नहीं आने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की मांग पर अड़े रहे। एसपी के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम खोला और शव का अंतिम संस्कार किया। बुधवार को जाट कॉलेज स्टाफ ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए 26 अक्तूबर तक का अल्टीमेटम दिया है।
नहीं मनाई गांव में दिवाली, जाट शिक्षण संस्थानों में भी रहा अंधेरा
बलजीत सिंह नांदल की हत्या के विरोध में बुधवार को बोहर गांव में किसी घर में दिवाली नहीं मनाई गई। वहीं, जाट संस्था के प्रधान मास्टर सुरेंद्र सिंह नांदल पहले ही हत्या के विरोध में जाट शिक्षण संस्थाओं में दिवाली नहीं मनाने की बात कही थी।