करीब आठ महीनों की दौड़-भाग के बाद पंजाब में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के सरगना जगदीश भोला की गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले तो हैं ही, इनसे यह खुलासा भी होता है कि देश में इस काले धंधे की जड़ें कितनी गहराई तक फैल चुकी हैं।
कुश्ती में अपनी उपलब्धि के लिए भारत केसरी, रुस्तम-ए-हिंद और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने वाला, पंजाब पुलिस में डीएसपी के पद तक पहुंचने वाला और कई पंजाबी फिल्मों में काम करने वाला शख्स अगर दाऊद इब्राहीम बनने के सपने देखता है, तो यही अपने आप में स्तब्ध करने वाला मामला है। पुलिस से लंबी आंख-मिचौली खेलने के बाद अंततः जब वह पकड़ा जाता है, तो मालूम होता है कि उसके गिरोह ने अब तक लगभग तीन सौ किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स देश से बाहर भिजवाएं हैं!
ड्रग तैयार करने के उसके नेटवर्क में अगर चीन व वियतनाम के लोग थे, तो उनकी तस्करी के लिए भोला ने अफ्रीकी मूल के लोगों को रखा था। पंजाब की कई जगहों में तैयार करने के बाद यूरोप और अमेरिका तक ये ड्रग्स एयर कार्गो के जरिये भी जाते थे, और कोरियर के जरिये भी, जो जूतों, किताबों, केले पकाने के पाउडरों, यहां तक कि धर्मगुरुओं की तस्वीरों के फ्रेम में भी छिपाकर भेजे जाते थे!
पंजाब वैसे भी नशे के धंधे की मुफीद जगह माना जाता है। इसके बावजूद ड्रग्स की तस्करी का इतना बड़ा नेटवर्क बगैर राजनीतिक संरक्षण के चल ही नहीं सकता था। खुद भोला ने अकाली दल के कुछ स्थानीय नेताओं से अपने संपर्क की बात कुबूली है। बताया तो यह भी जाता है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में उसे टिकट देने की तैयारी थी। भोला के जो सहयोगी कारोबारी अपनी फैक्टरियों में सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करते थे, वे कार का खास नंबर पाने के लिए लाखों रुपये लुटा देते थे।
यह पूरा प्रसंग बताता है कि ड्रग्स के काले धंधे ने खेल, राजनीति और उद्योग के एक हिस्से को अपनी चपेट में लिया है। इस साल की शुरुआत में एक मुक्केबाज के ड्रग्स से जुड़े होने की खबर आई थी, तो पिछले साल कुछ क्रिकेटरों को मुंबई की एक रेव पार्टी में पाया गया था। पंजाब पुलिस ने जिस मेहनत और तत्परता से इस गिरोह को ध्वस्त किया है, उसके लिए वह बधाई की हकदार है, पर उतना ही लाजिमी अब यह है कि इस सफलता को ड्रग्स के तंत्र के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में तब्दील किया जाए।