आम आदमी पार्टी दिल्ली की राजनीति में तेजी से जगह बना रही है। चंद दिनों पहले तक कई सर्वेक्षणों में उसे विधानसभा चुनावों में तीसरे नंबर की पार्टी बताया जा रहा है। लेकिन अन्ना हजारे द्वारा अरविंद केजरीवाल को लिखी गई चिट्ठी के बाद ये पार्टी भी मुश्किल में पड़ गई है।
अन्ना ने केजरीवाल पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में जुटे पैसे को चुनावों में लगाने का आरोप लगाया है। जवाब में अरविंद केजरीवाल ने आरोपों की जांच कराने की पेशकश की है। पहली नजर में ये अन्ना के आरोप देश की दूसरे राजनीतिक दलों पर लग रहे अरोपों जितने गंभीर नहीं दिखते। एक तरफ जहां घोटालों में सर से पांव तक डूबे राजनेता हैं, अपराधियों के सांठगांठ से चल रही पार्टियां हैं, वहीं आप लगातार शुचिता की राजनीति की वकालत कर रही है।
उनके नेता जनांदोलनों से निकले हैं, पार्टी पर भी अब तक कोई गंभीर आरोप भी नहीं लगे हैं। ऐसे में अन्ना के आरोप आप की साख को कमजोर भले न करें, मन में आशंका तो जरूर पैदा करते हैं।