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मोदी सरकार का एक साल

Mon, 25 May 2015 08:23 PM IST
नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियां बताने के लिए जनसंघ विचारक दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली मथुरा (चंद्रभान) में हुई रैली में खुद को देश का प्रधान ट्रस्टी और संतरी बताकर यही संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी सरकार के आने से शासन के तौर-तरीके बदल गए हैं। उम्मीदों के विपरीत मोदी ने सेना के लिए एक रैंक एक पेंशन या फिर किसानों से संबंधित बड़ी घोषणा तो नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जताने की कोशिश जरूर की कि उनकी सरकार गरीबों और वंचितों के लिए फिक्रमंद है। संभवतः ऐसा इसलिए है, क्योंकि जमीन अधिग्रहण कानून में संशोधन को लेकर संसद और उसके बाहर सरकार और विपक्ष के बीच हुए टकराव से सरकार की छवि पर असर पड़ा है।
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पर इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता कि मोदी सरकार ने रसोई गैस के लिए नकद सब्सिडी, जन-धन योजना, सामाजिक पेंशन से लेकर आधार कार्ड और छोटे कारोबारियों के लिए मुद्रा बैंक की स्थापना जैसी पहल की है, जो उसे सीधे निचले तबके से जोड़ती है। हालांकि मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि तो यही है कि उस पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है, जिस कारण यूपीए और खासतौर से कांग्रेस की इतनी दुर्गति हो गई कि उसे मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के दर्जे लायक सीटें तक नहीं मिलीं!

इसमें दो राय नहीं कि सरकार के इस पूरे एक वर्ष का केंद्र खुद प्रधानमंत्री मोदी ही रहे हैं, जो एक मजबूत नेता बनकर उभरे हैं। लिहाजा सरकार के कामकाज में, चाहे वह स्वच्छता अभियान हो या फिर मेक इन इंडिया, सीधे उनकी छाप दिखती है। इस पर भी गौर करने की जरूरत है कि प्रधानमंत्री की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मसलन, जहां देश के साठ करोड़ लोगों के लिए शौचालय की व्यवस्था अब भी एक बड़ी चुनौती है, वहीं 18 देशों की यात्राएं कर वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होने के बावजूद प्रधानमंत्री की पहल निवेशकों को खास आकर्षित नहीं कर सकी है।
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'अच्छे दिन' के वायदे के साथ सत्ता में आए मोदी ने कहा है कि आम लोगों के लिए 'बुरे दिन गए' और बुरा करने वालों के और 'बुरे दिन आएंगे'। उन्हें ध्यान रखना होगा कि पिछली सरकार की नाकामियों पर एक हद तक ही बात की जा सकती है, अंततः जनता उनकी सरकार के कामकाज को ही कसौटी पर कसेगी।
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