बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैविक खेती के बहुत बड़े पैरोकार हैं। नीतीश के प्रोत्साहन से बिहार के नालंदा जिले में कतरीसराय प्रखंड के देशपुरवा गांव के किसानों ने आलू उत्पादन का विश्व कीर्तिमान बनाया है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद, नालंदा के देशपुरवा गांव के किसानों ने जैविक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 729 क्विंटल आलू पैदा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इतना उत्पादन कहीं भी दर्ज नहीं किया गया है।
कई राज्यों में चली मुहिम
राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा किसानों को ऑगरेनिक खेती की ट्रेनिंग दी जा रही है। जो भी किसान ऑगरेनिक विधि से खेती करते हैं, पहले उनके उत्पादों का सर्टिफिकेशन किया जाता है। इसका अर्थ है कि यह उत्पाद ऑगरेनिक हैं। इसके बाद किसान का उत्पाद चैन मैनेजमेंट के जरिए बाजार में उतारा जाता है।
शेखावटी बन गया मिसाल
राजस्थान में शेखावटी क्षेत्र ऑरगेनिक खेती की मिसाल बन गया है। यहां मोरारटा फाउंडेशन ऑरगेनिक खेती को बढ़ावा देने का मिशन चला रहा है जिसमें अभी तक 5 लाख किसान जुड़ चुके हैं। मोरारटा फाउंडेशन राजस्थान के अलावा देश के 18 राज्यों में ऑरगेनिक खेती के मिशन को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए पहले किसान को सर्टिफाइड यानी खेती की और जैविक उत्पाद की ट्रेनिंग दी जाती है।
270 ऑरगेनिक उत्पाद
फाउंडेशन ऑरगेनिक खेती से पैदा हो रहे 270 ऑरगेनिक उत्पाद उपभोक्ता तक पहुंचा रहा है। इसके लिए मोरारटा फाउंडेशन वैल्यू चेन मैनेजमेंट का सहारा ले रहा है। ये मैनेजमेंट सिस्टम कुछ इस तरह काम करता है। किसान के खेत से कलेक्शन सेंटर तक। कलेक्शन सेंटर से से केंद्रीय गोदाम और फिर प्रोसेसिंग सेंटर तक। प्रोसेसिंग सेंटर से सीधा आउटलेट्स तक।
क्या आपको लगता है कि कम अन्न उपजाने के बावजूद ऑरगेनिक खेती किसान और जमीन के हित में है। क्या ऑरगेनिक खेती को बढ़ावा देने से किसान का भला होगा?