दिन भर दफ्तर में काम के बाद अगर आप अपने बॉस को कोसते हैं और अपनी जीवनशैली को तनाव भरी मानते हैं तो आप इस गलतफहमी से बाहर निकलिए। हाल में एक शोध में माना गया है कि दफ्तर में कम समय तक काम करना भी तनाव की बड़ी वजह हो सकता है।
दक्षिण कोरिया में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने माना है कि जो लोग हफ्ते में कम घंटे काम करते हैं वे दूसरों की अपेक्षा अधिक तनावग्रस्त रहते हैं। शोध के दौरान 'फाइव डे वर्किंग' दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों की जीवनशैली और सेहत पर अध्ययन किया गया है।
'फाइव डे वर्किंग कल्चर' पर उठाया सवाल
शोधकर्ता डॉ. रोबर्ट रुडोल्फ ने अब तक के हुए उन शोधों पर सवाल उठाया जिनमें 'फाइव डे वर्किंग कल्चर' को सेहतमंद माना गया है। वह बताते हैं, ''अधिक घंटों तक काम करना अधिक सेहतमंद है, यह उन शोधों से भी साबित होता है जिसमें यह माना गया है कि कामकाजी महिलाएं अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ होती हैं।''
डॉ. रोबर्ट ने अपने अध्ययन के आधार पर यह भी माना कि कम घंटे काम करने का जीवन के प्रति संतुष्टि से कोई संबंध नहीं है। वह कहते हैं, ''हमें अब तक के हुए उन शोशों पर दोबारा अध्ययन करना चाहिए जिनमें कम घंटों तक काम करने को सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है।''
शोधकर्ताओं ने इस शोध में माना है कि सेहतमंद जीवनशैली की तर्ज पर जो बहुराष्ट्रीय कंपनियां 'फाइव डे वर्किंग कल्चर' को तरजीह दे रही हैं, खुद उनके कर्मचारी अपेक्षाकृत अधिक तनावग्रस्त रहते हैं।