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7 चीजें जिनपर मर्द कभी नहीं चाहते खर्च

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कंजूसी वैसे तो किसी व्यक्ति विशेष के स्वभाव में होती है लेकिन बात जब फालतू खर्च की आती है तो इसे लेकर हर किसी का अपना नजरिया है।
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ऐसे में आमतौर पर पुरुष कुछ चीजों पर खर्च करने से अक्सर बचते हैं। वजह की गहराई में न जाएं क्योंकि इसके पीछे तर्क सिर्फ एक है, और वह सिर्फ यह कि उनके लिए कुछ चीजों पर खर्च करना फालतू खर्च है।

मेन्स एक्सपी ने भारतीय पुरुषों की मानसिकता पर अपने शोध में ऐसी ही सात चीजों की जानकारी दी है जिसपर खर्च अमूमन भारतीय मर्द फालतू ही समझते हैं।

आप भी जानें इनके बारे में और बताएं कि क्या आपके लिए भी ये फालतू खर्च हैं?

फिल्म की महंगी टिकट

किसी फिल्म का आप महीनों तक इंतजार करें और सिनेमाघर जाकर टिकट के दाम आपको महंगे लगे, इसलिए दूसरी फिल्म देख लें ऐसा हो सकता है। लेकिन पुरुषों के लिए फिल्म की महंगी टिकट लेना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

सिनेमाघर में पॉपकॉर्न

गर्लफ्रेंड को सिनेमा दिखाने ले जाएं और पॉपकॉर्न खरीदें, यह पुरुषों के लिए बड़ी बात नहीं है लेकिन जब चार दोस्त फिल्म देखने साथ जाते हैं तो सिनेमाघर का वही पॉपकॉर्न फालतू खर्च नजर आता है।

हां, फिल्म देखने के बाद बाहर निकलकर खाना जरूर उन्हें पैसा वसूल लगता है। आपके साथ ऐसा है क्या?

पार्किंग चार्ज

वैसे तो घंटों तक कार पार्किंग या बाइक की पार्किंग पर सौ-पचास देने से भला कौन कतराता है लेकिन जंब सिर्फ पांच मिनट के लिए गाड़ी पार्क करके एटीएम से पैसे निकालने हों तो पार्किंग की फीस बहुत बड़ी लगती है। है ना?

शॉपिंग बैग

दुकान पर हजारों की खरीदारी कर लें लेकिन जब दुकानदार पांच रुपए शॉपिंग बैग के लिए अक्सर काउंटर पर पुरुष झगड़ते दिख जाएंगे। बुरा न मानें, पर दुकान से कैरी बैग खरीदना आपको भी फालतू खर्च तो लगता ही होगा।

वारंटी बढ़ाना

अक्सर फोन से लेकर फ्रिज तक, जरूरत के किसी भी सामान को आप वारंटी में खरीद तो लेते हैं लेकिन जब वारंटी बढ़ाने की बात आती है तो पुरुषों के सामने यह भारी खर्च की तरह होता है। क्या आपके साथ भी ऐसा है?

ऐप्स पर पैसा

फ्री की ऐप्स से मोबाइल भर देंगे लेकिन अगर पसंदीदा एप्स 250 की हो तो उसे डाउनलोड करने की फेर में कौन पड़ता है। आखिर 250 रुपए में कितनी देर बात हो सकती है या फिर अनलिमिटेड प्लान मिल सकता है। तो फालतू खर्च क्यों?

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सर्विस टैक्स

होटल में खाते वक्त वेटर को टिप देना तो आप की मर्जी पर निर्भर करता है लेकिन जब खाने जितना ही सर्विस टैक्स कट जाए तो उस होटल में दोबारा जाना में गंवारा नहीं होता। क्या कहते हैं आप?
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