शोध के मुताबिक बच्चों की नींद टूटने की वजह सोशल मीडिया का इस्तेमाल है।
कार्डिफ़ विश्वविद्यालय की टीम ने पाया कि हर पांच बच्चों में से एक से ज़्यादा ने रात में उठ कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और इसके चलते अगले दिन स्कूल में उन पर थकान हावी रही।
पूरे वेल्स के अलग अलग स्कूलों के 848 बच्चों का सर्वे किया गया और इसमें पाया गया कि हर तीन बच्चे में से एक बच्चा लगातार थका हुआ था।
लेकिन इसकी तुलना में उन बच्चों का संख्या कहीं ज़्यादा थी जिन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया और उन सभी बच्चों के जागने का समय एक ही था।