कई बार महिलाओं की शिकायत होती है कि उनके पति दफ्तर से घर आने पर ठीक से बात नहीं करते या फिर उनके स्वभाव में आ रही उदासीनता को कामकाज की थकान समझ लिया जाता है। लेकिन असलियत में वे डिप्रेशन के शिकार होते जा रहे हैं, इसे समझने में कई बार बहुत देर हो जाती है।
ऐसे पहचानें डिप्रेशन
कई बार थकान या किसी अन्य कारण से जीवनसाथी का व्यवहार बदलता है पर बदलाव अगर लंबा दिखे तो सोचने वाली बात है। अगर वह हमेशा की तुलना में बहुत ज्यादा खामोश रहने लगें तो हो सकता है कि वह डिप्रेस्ड हैं।अचानक से अगर वह मौज-मस्ती या बाहरी गतिविधियों में रुचि लेना कम कर दें और बाहर जाने से कतराएं तो भी उन्हें डिप्रेशन होने की आशंका हो सकती है।आपके सवालों के जवाब में अगर वह बहुत ज्यादा चिड़चिड़ाएं तो आप दुखी होने के बजाय इसे उनके डिप्रेशन का लक्षण समझ सकती हैं। इसके अलावा अगर वह बहुत अधिक स्मोक करें या ड्रिंक करें तो भी डिप्रेस्ड हो सकते हैं। हर वक्त उन्हें थकान लगे तो भी हो सकता है कि वह डिप्रेस्ड हैं। डिप्रेशन की स्थिति में एनर्जी लेवल तेजी से गिरता है। लगातार उदास रहने वाला व्यक्ति भी डिप्रेस्ड हो सकता है। डिप्रेशन में हर समय बेचैनी महसूस होती है जिससे छोटी-छोटी बातों पर मूड खराब हो जाता है।रात भर नींद न आना या अधिक नींद आना भी अवसाद का बड़ा लक्षण है। अगर आपके पार्टनर को भी रात भर नींद नहीं आती या वह जरूरत से ज्यादा सोते हैं, तो उनपर चिढ़ने के बजाय उनकी समस्या को सुनें।कई बार डिप्रेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग प्रकार के होते हैं। किसी को बहुत भूख लगती है तो किसी की भूख ही खत्म हो जाती है। ऐसे में अपने जीवनसाथी के खानपान में आएं बदलाव को पहचानें और सि गंभीरता से लें। निराशा डिप्रेशन का सबसे बड़ा लक्षण है। कई बार व्यक्ति में निराशा कुछ इस तरह बढ़ जाती है कि उसके मन में आत्महत्या जैसे खयाल आते हैं। ऐसी कोई भी बात यदि आपके पार्टनर कहते हैं तो उसे गंभीरता से लें।