जैसे स्वस्थ रहने के लिए सलाह दी जाती है- 'प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर' ठीक वैसे ही महिलाओं के साथ होने वाले आपराधिक मामलों में भी यही फॉर्मूला लागू होता है।
प्रशासन के दावे चाहे कुछ भी हों, कड़े कानून भी बन जाएं, लेकिन इन सब के साथ हमें अपनी सुरक्षा का खुद भी ध्यान रखना होगा।
महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा का असर उन पर सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं होता, बल्कि मानसिक रूप से भी ये घटनाएं उनके मन पर गहरा घाव छोड़ जाती हैं। इसलिए ऐसी अनहोनी से बचने के लिए पर्सनैलिटी मेंटर रीटा गंगवानी से बातचीत के आधार पर इन 4 एलर्ट पर हमेशा ध्यान दें।
1. चुप न रहें, विरोध जताएं
शारीरिक शोषण या हिंसा से बचने के लिए सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग तो है, पर मानसिक हिंसा का सामना करने या उससे बचने के लिए क्या किया जाए?
ऐसी स्थिति में कुछ बातें हैं, जो महिलाओं के लिए और उनके आत्मविश्वास को कायम रखने में मददगार साबित हो सकती हैं। जैसे जो चीज आपको गलत लग रही है, उसके लिए मना करने में कुछ भी गलत नहीं है।
इसके बावजूद घर, ऑफिस या कहीं और मानसिक शोषण का सामना करना पड़े, तो बिना किसी संकोच के अपने नजदीकी लोगों की मदद लें।
दुश्मन को चकित कर देने या उसका ध्यान भटकाने के लिए नाक, गला, गर्दन, बिलो दी बेल्ट, ज्वाइंट्स या सिर पर वार करें। इन जगहों पर वार करना सबसे ज्यादा असरदार होता है।
2. घर की खास बात
खिड़कियों और दरवाजों को निकलने से पहले चेक कर लें कि वो प्रॉपर तरीके से बंद हैं या नहीं। घर के मुख्य दरवाजे पर एक मजबूत चेन जरूर लगाएं। संभव हो तो दरवाजे पर व्यू फाइंडर लेंस लगाएं ताकि आप बाहर आए व्यक्ति को देख सकें। रात को सोते समय खिड़कियां बंद रखें और उन पर परदा जरूर रखें।
सेल्समैन, बिजली या पानी का मीटर चेक करने वाले या अन्य कर्मचारी आएं, तो उनका आइडेंटिटी कार्ड जरूर देखें। शक होने पर उनकी कंपनी को फोन करके पूछने से मत हिचकिचाइए।
किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन करने के बहाने या किसी और बहाने से घर में दाखिल न होने दें और किसी भी हालत में यह जाहिर न होने दें कि आप घर में अकेली हैं।
अपने घर पर काम करने वाले लोगों को सख्त हिदायत दें कि वह किसी भी अनजान व्यक्ति से व्यक्तिगत जानकारी शेयर न करें। मसलन, घर पर कौन-कौन है और आप कब वापिस आएंगी।
अगर ऑफिस से निकलने में देरी होने वाली है, तो इस बारे में अपने घरवालों को जरूर बताएं। सड़क पर आत्मविश्वास के साथ चलें और चलते वक्त कंधों को सीधा रखें। इस तरह से चलने वालों को कॉन्फिडेंट माना जाता है।
3. गाड़ी में सुरक्षा
बिना रोशनी की पार्किंग, बेसमेंट पार्किंग या दफ्तर के बाहर किसी सुनसान जगह पर पार्किंग में हमेशा सतर्क रहें। सिर झुकाकर चलने के बजाय सिर सीधा रखकर चलें और आसपास नजर रखें। चलते समय ट्रैफिक की तरफ चेहरा करके चलें, ताकि कोई आपको खींच न सके।
अगर कोई वहां आप से रास्ता पूछने के लिए रुकता है, तो आप वाहन से थोड़ी दूरी बनाकर रखें। कभी भी अनजान लोगों से लिफ्ट न लें। अगर कोई वाहन जान-बूझकर आपको दो- तीन बार लगातार क्रॉस करता है, तो सतर्क हो जाइए और पुलिस को कॉल करें।
अगर आपका वाहन रास्ते में सुनसान जगह पर खराब होती है, तो खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। जब तक कि आप तक मदद नहीं पहुंचती, गाड़ी से बाहर मत निकलिए। जिनको आप नहीं जानती या वैसे व्यक्ति जिन्होंने शराब पी रखी हो, उनका साथ न लें।
4. तब हो जाएं सावधान
अगर आपके फोन पर कोई रॉन्ग नंबर आता है, तो उन्हें अपना नाम या नंबर आदि कभी न बताएं। बार-बार कोई फोन पर तंग करता है, तो इसकी सूचना पुलिस को भी दें।
लिफ्ट में जाते वक़्त अगर आप अकेली हैं और साथ में कोई ऐसा व्यक्ति अंदर घुस आता है, जिसके हाव भाव पर आपको संदेह है, तो उस लिफ्ट में न जाइए।