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रात में नाइट बल्ब जलाकर सोते हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर

Tue, 22 Oct 2013 11:51 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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क्या आपको बिस्तर पर लेटने के बाद देर तक नींद नहीं आती है? या फिर अच्छी नींद लेने और सेहतमंद जीवनशैली के बावजूद भी आपका वजन बढ़ता ही जा रहा है? इसकी वजह आपका नाइट बल्ब भी हो सकता है।
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नींद नहीं आती है तो इन आदतों को बदलें

डेली मेल में प्रकाशित ब्रिटिश शोध की में तो कमरे में लाल रंग का नाइट बल्ब जलाकर सोने से नींद जल्दी आती है लेकिन इसका एक साइड एफेक्ट भी है। इसी शोध में यह भी माना गया है कि कमरे में सोते वक्त आर्टिफिशियल लाइट जलाने से वजन बढ़ने या अनिद्रा की समस्या भी हो सकती है।

नींद में डरते हैं तो यह उपाय है कारगर

शोधकर्ताओं का मानना है कि रात में नाइट बल्ब जलाकर सोने वाले लोगों को मोटापे से लेकर डायबिटिज, डिप्रेशन और कैंसर तक का रिस्क हो सकता है। यूरोपियन कमिशन के शोध के अनुसार, ''रात में आर्टिफिशियल लाइट में सोने से न सिर्फ नींद ओर मोटापे की दिक्कत हो सकती है बल्कि ब्रेस्ट कैंसर, गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल समस्याएं, मानसिक रोग और कार्डियोवास्कुलर रोग की आशंका अधिक होती है।''
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इसके अलावा, नाइट बल्ब के इस्तेमाल को लेकर और भी कई शोध हुए हैं जिसमें कुछ चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।

लाइट बल्ब की शरीर को आदत नहीं है
यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट हेल्थ सेंटर के शोधकर्ताओं का मानना है कि चूंकि मनुष्य की आधुनिक प्रजाति दो लाख साल पुरानी है और बल्ब का इस्तेमाल पिछले सौ सालों से ही हो रहा है इसलिए यह हमारे शरीर के लिए स्वाभाविक नहीं है।

उनका मानना है कि आर्टिफिशियल लाइट के इस्तेमाल से 24 घंटे की बायोलजिकल क्लॉक प्रभावित होती है जिससे सेहत संबंधी समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है।

मोटापा बढ़ता है
शोध में यह भी पाया गया कि नाइट बल्ब के अधिक इस्तेमाल वाले लोगों के शरीर में इन्सुलिन, ग्रेलिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है जिससे मोटापे का रिस्क बढ़ सकता है।

नीली लाइट है सबसे खतरनाक
शोध के अनुसार न सिर्फ नीला लाइट बल्ब बल्कि टीवी स्क्रीन, कंप्यूटर आदि से निकलने वाली नीली लाइट, जो आमतौर पर हमें सफेद प्रतीत होती है, हमारी आंखों और बॉडी क्लॉक को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
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यही वजह है कि इस लाइट मेंसोने वाले या देर तक कंप्यूटर या टीवी के सामने रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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