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किशोरावस्था में अधिक हो वजन तो होगा यह नुकसान

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मोटापा न सिर्फ अधिक उम्र के लोगों के लिए सेहत से जुड़े कई खतरों की घंटी है बल्कि किशोरावस्था में भी अगर यह दिक्कत हो तो उनकी मानसिक सेहत से जुड़ी कुछ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
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हाल में हुए कुछ शोधों के आधार पर जानें किशोरों को मोटापे के कौन से बड़े मानसिक खतरे हो सकते हैं।
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लड़कियों के आईक्यू पर असर

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी में प्रकाशित ब्रिटिश शोध की मानें तो किशोरावस्था में मोटापे की शिकार लड़कियों का आईक्यू स्तर प्रभावित होता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि 10 से 11 साल की उम्र की लड़कियों को मोटापे की वजह से यह दिक्कत अधिक होती है।

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लड़कों की याददाश्त पर प्रभाव

स्वीडन के शोध की मानें तो किशोरावस्था के दौरान जो लड़के शारीरिक श्रम कम करते हैं उन्हें बढ़ती उम्र में याददाश्त से जुड़ा डिमेंशिया नामक रोग होने की आशंका अधिक होती है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध में 11 लाख प्रतिभागियों पर अध्ययन किया है जो ब्रेन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं का दावा है कि कसरत न करने वाले और मोटापे के शिकार किशोरों में याददाश्त से जुड़ी इस समस्या का खतरा सामान्य किशोरों की अपेक्षा 2.5 गुना अधिक होता है।
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