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ऐसे लोगों की दफ्तर से जल्दी हो जाती है छुट्टी

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आप कितनी भी मशक्कत करें और दफ्तर में कितना ही काम क्यों न करें लेकिन आपका डील-डौल आपके बॉस की नजर में आपका रवैया तय करता है।
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वर्जीनिया टेक और यूनिवर्सिटी ऑफ बफैलो के शोधकर्ताओं का मानना है कि मोटे लोगों को दफ्तर में नकारा समझा जाता है और उनकी कार्यक्षमता हमेशा कम ही आंकी जाती है।

शोध के दौरान एचआर विभाग के कर्मचारियों का मत जाना गया जिसमें आधे से अधिक प्रतिभागियों ने माना कि किसी भी व्यक्ति के मोटापे के कारण अक्सर उनकी कार्यक्षमता को कम आंका जाता है।
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ऐसे में होता है भेदभाव

शोधर्कताओं ने अपने अध्ययन में यह भी माना है कि अगर किसी के पास समान प्रोफाइल के मोटे और सामान्य कदकाठी के लोगों का बायोडाटा हो तो वे पहले सामान्य कदकाठी के लोगों को तरजीह देते हैं।

इस शोध का आधार पिछले महीने का एक अध्ययन है जिसमें माना गया है कि दफ्तर में मोटापे से ग्रस‌ित लोगों की कार्यक्षमता कम होती है और उन्हें चोट लगने का खतरा अध‌िक होता है।

शोधकर्ताओं ने माना कि न चाहते हुए भी मोटापा किसी भी व्यक्ति के बारे में सकारात्मक धारणा नहीं बनाने देता है जिस वजह से वे उन्हें कमतर आंकते हैं।
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क्या-क्या देखते हैं सीवी में

शोधकर्ता थॉमस मैन्सफील्ड ने अपने अध्ययन के दौरान एचआर विभाग के लोगों से नौकरी के लिए चुनाव से संबंधित मापदंडों पर बात की। उन्होंने पाया कि आधे से अधिक मामलों में मोटापे के कारण किसी व्यक्ति को कमतर आंका जाता है।

दूसरी ओर, उन्होंने पाया कि एक तिहाई एचआर कर्मचारियों ने माना कि वे शारीरिक संरचना के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं।

करीब 56 प्रतिशत एचआर कर्मचार‌ियों ने माना कि वे किसी भी व्यक्ति को नौकरी जेने से पहले उसकी परफॉर्मेंस और चरित्र का अध्ययन करते हैं।

शोधकर्ताओं ने माना कि न सिर्फ नौकरी देते वक्त बल्कि नौकरी के दौरान भी मोटे लोगों को अपनी जगह बनाने में देर लगती है क्योंक‌ि उनके प्रति लोगों का नजर‌िया गलत होता है।
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