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क्या आप भी 'आईक्यू' को लेकर ऐसा सोचते हैं?

Mon, 10 Jun 2013 05:42 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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आमतौर पर किसी भी व्यक्ति के बौद्धिक स्तर यानी आईक्यू को उसकी बौद्धिक योग्यता का पैमाना माना जाता हैं और उसके आईक्यू के आधार पर उसकी परख की जाती है। लेकिन कई बार हम आईक्यू के बारे में जो धारणाएं बना लेते हैं उनका कोई भी ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं होता है।
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आइए जानें, आईक्यू से संबंधित पांच सबसे आम भ्रमों और उनकी असलियत के बारे में।

भ्रम 1 - आईक्यू कभी नहीं बदलता
असलियत - आप जिस परिवेश में रहते हैं, जो पढ़ते हैं और जो अनुभव करते हैं, उसके आधार पर आपका आईक्यू बदलता है। इसलिए यह मानना गलत है कि कम आईक्यू वाले इंसान का आईक्यू बढ़ नहीं सकता या फिर अधिक आईक्यू वाले इंसान का आईक्यू कम नहीं हो सकता।

भ्रम 2 - बुद्धिमत्ता परखने का पैमाना सिर्फ आईक्यू
असलियत - कोई व्यक्ति कितना बुद्धिमान है, इसे जांचने का एकमात्र तरीका आईक्यू टेस्ट नहीं है। यह बौद्धिक स्तर को जानने का एक तरीका हो सकता है लेकिन इसके आधार पर किसी को अधिक बुद्धिमान या किसी को बुद्धिहीन नहीं ठहराया जा सकता।
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भ्रम 3 - बुद्धिमत्ता आनुवांशिक है
असलियत - यह सोच बिल्कुल निराधार है कि माता-पिता बुद्धिमान है तो उनके बच्चों का बौद्धिक स्तर भी अधिक होगा। हां, अनुवांशिकता का थोड़ा प्रभाव बौद्धिक स्तर पर जरूर पड़ता है लेकिन आईक्यू का कम या अधिक होना परिवेश पर भी बहुत हद तक निर्भर करता है।

भ्रम 4 - बड़े बच्चे का आईक्यू स्तर बेहतर
असलियत - 19वीं सदी में ऐसे कई शोध हो चुके हैं जिनमें यह दावा किया गया कि परिवार में सबसे बड़े बच्चे का बौद्धिक स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है। हालांकि इन अध्ययनों में लड़कियों के लिए यह बात नहीं कही गई। हाल के कुछ शोधों में यह माना गया कि आईक्यू कम या ज्यादा होने का संबंध बच्चों के माहौल और पोषण से है न कि उनके बड़े या छोटे होने से है।

भ्रम 5 - नई पीढ़ी का बौद्धिक स्तर पिछली पीढ़ी से अधिक
असलियत - अक्सर हम ऐसा मानते हैं कि हर नई पीढ़ी अपनी पिछली पीढ़ी से अधिक बुद्धिमान होती है और यह परपंरा पीढ़ी दर पीढ़ी अनुवांशिक तौर पर बढ़ रही है।

डिस्कवरी चैनल ने अपने अध्ययन में माना कि नई पीढ़ी अपनी पिछली पीढ़ी से अधिक बुद्धिमान है, इसकी वजह सिर्फ अनुवांशिक नहीं है बल्कि आधुनिकता, सुविधा और शिक्षा है।
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