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रोज ढाई लीटर पानी पियो..ऐसे वहम आपको तो नहीं

Tue, 07 Jan 2014 04:49 PM IST
पारुल बुधकर
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मेडिकल साइंस ने बेशक बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन फिर भी सेहत और खान-पान से जुड़े कई मिथ आज भी प्रचलित हैं। कुछ बातें तो ऐसी हैं, जिनसे जुड़े तथ्यों के बारे में लोग बिलकुल नहीं जानते, मगर उन पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं।
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गाजियाबाद स्थित जिला अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉ. स्मृति शर्मा के अनुसार, ''अक्सर लोग कही-सुनी बातों पर आंख मूंद करके यकीन कर लेते हैं और उनके बारे में तथ्य तलाशने की कोशिश नहीं करते। यह आदत सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित होती है। मेडिकल साइंस के इस जमाने में बरसों पुरानी धारणाओं को मानना ठीक नहीं है। किसी भी तरह की परेशानी होने या कुछ अलग तरह के लक्षण सामने आने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।''

जानिए, ऐसे ही कुछ दिलचस्प मिथ्स और उनसे जुड़े तथ्यों के बारे में।

स्वेटर पहनो वर्ना सर्दी हो जाएगी

बचपन से हम ये सुनते आ रहे हैं और न जाने कितनी बार इसके लिए मम्मी की डांट भी खाई होगी। लेकिन सच यह है कि जुकाम सर्दी की वजह से नहीं वायरस की वजह से होता है।

करीब दो सौ तरह के वायरस हमें बीमार करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये वायरस हवा के जरिए या किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से हम तक पहुंच सकते हैं। सर्दियों में ये वायरस ज्यादा परेशान करते हैं क्योंकि हम बाहर कम निकलते हैं और ज्यादा अंदर रहने की वजह से लोगों के संपर्क में ज्यादा आते हैं।

चॉकलेट और तला हुआ भोजन खाने से मुंहासे होते हैं

बरसों से चले आ रहे इस मिथ में बिलकुल सच्चाई नहीं है। जानकारों का मानना है कि मुंहासे तब होते हैं जब त्वचा के ऑयल ग्लैंड्स अत्यधिक सीबम प्रोड्यूस करते हैं। इसी सीबम की वजह से त्वचा में नमी बनी रहती है।

जब यह सीबम बहुत ज्यादा निकलने लगता है और डेड स्किन त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देती है तो मुंहासे हो जाते हैं। ज्यादा तनाव और कुछ आनुवांशिक कारणों से भी मुंहासे हो सकते हैं।

प्रतिदिन दो-ढाई लीटर पानी जरूरी

पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन अलग-अलग व्यक्ति की जरूरत इस मामले में भी अलग-अलग होती है।

चिकित्सा अधिकारी डॉ.कमल सिंह कहते हैं कि शरीर में पानी की जरुरत को पूरा करने के लिए ढाई लीटर पानी पीने की ही जरुरत नहीं, हम जो भी खाते हैं या किसी भी तरह के तरल खाद्य पदार्थ में भी पानी होता है।

शरीर में पानी की मात्रा ठीक है या नहीं ये पता करने का सबसे आसान तरीका है कि यदि यूरीन हल्के रंग का या ट्रांसपेरेंट है तो पानी काफी है और यदि गहरे पीले रंग का है तो शरीर को पानी की जरुरत है।

हुक्का, सिगरेट से कम नुकसानदायक है

आजकल चल रहे मिथ में ये सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक मिथ है। युवाओं में हुक्का बार की बढ़ती लोकप्रियता को भुनाने के लिए इस मिथ को मार्केट स्ट्रैटजी के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि सच ये है कि हुक्का, सिगरेट से कहीं ज्यादा नुकसानदायक है।

हुक्के में तंबाकू पीने के लिए कोयले और पानी का इस्तेमाल होता है। मिथ के अनुसार पानी तंबाकू के कैमिकल को फिल्टर करता है जो बिल्कुल गलत है। हुक्का पीने से कार्बनमोनोक्साइड के साथ वो सारे हैवी मैटल शरीर के अंदर जाते हैं जो सिगरेट पीने से जाते हैं।

डॉ.स्मृति शर्मा कहती हैं कि हुक्का ज्यादा नुकसान करता है क्योंकि इसे सिगरेट के मुकाबले ज्यादा देर तक पीया जाता है और एक हुक्के को एक से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं, जिससे माउथ इन्फेक्शन, हेपेटाइटिस और टीबी जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
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दांत निकलने के दौरान बच्चों को होता है बुखार

दादी-नानी से अक्सर ये बात आपने सुनी होगी कि जब छोटे बच्चों के दांत निकलना शुरू होते हैं तो उन्हें बुखार होना आम बात है। ये सच है कि दांत निकलने के समय बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है, लेकिन उसका सीधा कारण दांत निकलना नहीं होता।

डॉ. स्मृति शर्मा बताती हैं कि करीब दस महीने की उम्र में जब बच्चे के दांत निकलते हैं तो वो घुटने के बल चलना भी शुरू करता है। ऐसे में उसके हाथ गंदे होते हैं और ये गंदगी उसके मुंह में जाती है, जिससे पेट खराब होता है और बुखार आता है।

इसके अलावा दांत निकलने की इरीटेशन में भी बच्चे कुछ भी उठाकर मुंह में डालते हैं जिससे इन्फेक्शन होकर बुखार आ सकता है। ऐसे में यदि बच्चों की सफाई का ध्यान रखा जाए तो दांत निकलते हुए न ही उन्हें कोई तकलीफ होगी और न ही बुखार आएगा।

जिला अस्पताल, गाजियाबाद में मेडिकल ऑफिसर डॉ.कमल सिंह के अनुसार, ''बच्चों को दांत निकलते वक्त बुखार होना,  कोल्डड्रिंक से बेहतर है जूस पीना, .ये कुछ ऐसे मिथ्स हैं जिन पर लोग बिना सोचे-समझे यकीन करते हैं। मगर सच्चाई काफी अलग होती है। जब भी शरीर में किसी अलग तरह के लक्षण सामने आएं तो उन्हें बरसों पुरानी धारणाओं के आधार पर आम बात मानकर तसल्ली कर लेना ठीक नहीं है। समय रहते अपनी शंका का समाधान चिकित्सक की सलाह से जरूर कर लेना चाहिए।''
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