मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अगले तीन साल में बिजली बोर्ड में 2016 पद भरने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री मंगलवार को होटल पीटरहॉफ के प्रांगण में बिजली बोर्ड कर्मचारियों के अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड का टॉप भारी है लेकिन निचले स्तर पर कमजोरी है। इसलिए निचले स्तर के कर्मचारी भरे जाएंगे। इस साल 315 पद टी मेट के, 86 पद जेई के और 100 पद कंप्यूटर ऑपरेटरों के भरे जाएंगे।
उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि धूमल सरकार की अटल बिजली बचत योजना 16 लाख परिवारों के साथ धोखा थी।
इस योजना के बदले की ग्रांट बोर्ड को नहीं दी। इसे बोर्ड ने अपने खर्चों में शामिल कर नियामक आयोग में दिया, जिससे टैरिफ बढ़ गया।
अब बिजली बिल के रूप में इसे उपभोक्ता भुगत रहे हैं। निशुल्क सीएफएल पर तब करीब 80 करोड़ खर्चे गए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाथपा झाकड़ी की तरह यदि अन्य बड़े प्रोजेक्टों में भी प्रदेश का हिस्सा होता तो बोर्ड और प्रदेश को फायदा होता।
निजी कंपनियों को अधिकतर बड़े प्रोजेक्ट दिए जा चुके हैं। इनमें कुछ को बेचने की खबरें भी आ रही हैं। यदि इनमें हिमाचल का हिस्सा रहता तो ऐसा कभी नहीं होता।
उन्होंने बिजली बोर्ड कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि कुछ निजी कंपनियां आने वाले समय में हाथ खड़ा कर सकती हैं। इन प्रोजेक्टों को भी बोर्ड को ही देंगे।
लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के दूरदराज क्षेत्रों में बिजली है, लेकिन सप्लाई नेटवर्क नहीं है। स्थानीय प्रोजेक्टों से बिजली दी जा रही है। अब चंद्रभागा नदी के साथ साथ वहां के लिए 22 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जा रही है।
ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया, ऊर्जा निगम के एमडी डीके शर्मा, ट्रांसमिशन निगम के सुशील श्रीवास्तव, डा. सुभाष मंगलेट और हरीश जनारथा आदि भी इस मौके रहे।