दुर्गा पूजा मनाने के लिए पुलिस उपायुक्त के पास लोगों का आना हर साल आम बात है लेकिन इस बार जब दो मुस्लिम युवक पंडाल लगाने की अनुमति मांगने आए तो उपायुक्त भी हैरान रह गए।
नागपुर में शुक्रवार को पुलिस उपायुक्त के पास दो मुस्लिम युवक दुर्गा पूजा पंडाल लगाने की अनुमति मांगने गए, जिसे उपायुक्त ने अपने करियर में पहला मौका बताया।
अनुमति लेने गए मोहिन पठान ने बताया कि वे शुक्रवार की नमाज के बाद उपायुक्त से मिलने गए। उन्होंने नमाजी टोपी भी पहनी हुई थी। उपायुक्त ने उन्हें अंदर बुलाकर आने का कारण पूछा। जब मोइन और उनके साथी ने पंडाल लगाने की अनुमति मांगी तो वो भरोसा नहीं कर सके। उपायुक्त ने कहा कि किसी मुस्लिम का इसके लिए आना उनके करियर में पहली बार हुआ है। मोइन पठान दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले नव दुर्गा उत्सव मंडल के उपाध्यक्ष भी हैं।
38 सालों से नवरात्रा की धूम
यहां शहर में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारियों का एक समूह पिछले 38 सालों से एक परिवार की तरह नवरात्रा मनाता है। यहां रहने वाले हिंदू, मुसलिम, ईसाई और बुद्ध सब मिलकर वर्ष 1976 से दुर्गा पूजा करते हैं।
नव दुर्गा उत्सव मंडल के संस्थापक सदस्य के बेटे अनूप श्रीवास्तव बताते हैं कि सभी देशों के लोग इस फैक्ट्री में काम करते हैं। सबने इस उत्सव की खुशी को और बढ़ाया है।
इस मंडल के उपाध्यक्ष पठान बताते हैं कि वह बचपन से इसमें शामिल होते आ रहे हैं। उन्होंने शाम की आरती के लिए अपने ऑफिस का समय भी बदल लिया है।
बच्चे निभा रहे परंपरा
इसे शुरू करने वाले कई लोग अब नहीं रहे लेकिन उनके बच्चे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यहीं के अमिताभ अप्रेजा के पिता भी इस उत्सव का हिस्सा हुआ करते थे।
अब अमिताभ कहते हैं कि तीन दशक पहले दुर्गा मूर्ति की स्थापान का प्रचलन अधिक नहीं था। वो इस समय एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं लेकिन मंडल से जुड़े हुए हैं। उनकी पत्नी मुस्लिम हैं और बढ़चढ़कर इसमें हिस्सा लेती हैं।
जया अपरेजा उर्फ हुसैनीबाई शेख कहती हैं कि वह इन परंपराओं से बहुत जुड़ी हुई हैं। वह नमाज भी पढ़ती हैं और आरती करना भी उन्हें खुशी देता है।
किसी और पर निर्भर नहीं
यह मंडल इसलिए भी अलग है क्योंकि यह आयोजन के लिए किसी प्रायोजक पर निर्भर नहीं करता है। सभी मिलजुलकर इसके लिए फंड इकट्ठा करते हैं।
यहां एक फैक्ट्री में काम करने वाले चेतन मराठे 22 साल से इस आयोजन के लिए दुर्गा की मूर्ति बना रहे हैं। वह कहते हैं कि यह उनके लिए एक विशेष काम है इसलिए वह फैक्ट्री के काम के बाद समय निकाल लेते हैं।
यह मंडल दशहरा भी इतनी ही धूमधाम से मनाता है और जोर-शोर से रावण दहन किया जाता है।