दक्षिण अफ्रीका में एक जुलू प्रेशर ग्रुप ने वहां रहने वाले भारतीयों को देश में जारी ट्रांसफॉर्मेशन की प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए कहा है।
समूह का कहना है कि दक्षिण अफ्रीकी भारतीय, महात्मा गांधी के वहां रहने के वक्त से ही अश्वेतों को लेकर नस्लभेदी रुख अपनाते रहे हैं।
हालांकि, प्रांतीय सरकार और भारतीय समुदाय ने इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया है।
दक्षिण अफ्रीका, खास तौर से क्वाजुलू-नटाल प्रांत में मूल अश्वेत अफ्रीकी के सामाजिक-आर्थिक न्याय की वकालत का दावा करने वाले मजिबुए अफ्रीकन फोरम प्रांतीय सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहा है, जिसमें प्रांतीय सरकार 1860 में गन्ने की खेती के लिए वहां पहुंचे भारतीयों के सम्मान में डरबन में एक प्रतिमा लगाने की तैयारी कर रही है।
फोरम के चेयरमैन ज्वेली संगवेनी ने एक बयान में कहा, 'हम पहले भी कहते रहे हैं और अब भी कह रहे हैं कि भारतीयों को ब्लैक इकनॉमिक एम्पावरमेंट, अफरमेटिव एक्शन और एम्प्लॉयमेंट इक्विटी से तुरंत और बिना शर्त हटा दिया जाना चाहिए। अफ्रीकियों के साथ भारतीयों को वंचित तबके का दर्जा देना गलत फैसला है।'
उन्होंने कहा, 'भारतीय तब से अफ्रीकियों के खिलाफ नस्लभेदी रुख अपनाते रहे हैं, जब ब्रिटिश सरकार उन्हें यहां लाई थी।'