भाजपा नेतृत्व भी मानने लगा है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री व बागी नेता बीएस येदियुरप्पा को रोकने में ही पार्टी का हित है। इसलिए भाजपा उन्हें पार्टी के साथ रखने के लिए हर संभव प्रयास करने की कोशिश में जुट गई है। माना जा रहा है कि येदियुरप्पा को मनाने के लिए भाजपा उन्हें प्रदेश पार्टी अध्यक्ष पद सौंप सकती है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और प्रदेश प्रभारी महासचिव धर्मेंद्र प्रधान के साथ मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर और प्रदेश के अन्य नेताओं की मंगलवार को हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि येदियुरप्पा को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए। नाराज येदियुरप्पा ऐलान कर चुके हैं कि वे अगले माह 10 तारीख को भाजपा को अलविदा कहकर नई पार्टी बना लेंगे।
उनके इस ऐलान से भाजपा परेशान है। पार्टी मान रही है कि येदियुरप्पा के बाहर जाने पर प्रदेश में पार्टी संगठन बहुत कमजोर हो जाएगा। इसलिए उन्हें रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री समेत प्रदेश के नेता भी इसी रणनीति पर अमल कराने के लिए दिल्ली आए थे।
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को भी बैठक में शामिल होना था, लेकिन वे अपने ऊपर लगे आरोपों को लेक र कानूनी सलाह लेने के लिए नागपुर में ही रुक गए। उन्होंने जेटली को कर्नाटक के नेताओं के साथ बातचीत के लिए अधिकृत कर दिया था। इसके अलावा कर्नाटक के नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। वे पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी, वैंकेया नायडू, राजनाथ सिंह और महासचिव अनंत कुमार से मिलने पहुंचे।
साथ ही प्रदेश से आए नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से फोन पर बात कर येदियुरप्पा को रोकने के लिए पहल करने का आग्रह किया। प्रधान ने कहा कि सभी की राय है कि येदियुरप्पा को पार्टी से बाहर जाने से रोका जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समस्या का कोई समाधान निकल जाएगा।