देश में मध्यावधि चुनाव की चर्चाओं और सरकार पर नीतिगत लाचारी का दाग धोने को आतुर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब अपने नए मंत्रिमंडल को तेज रफ्तार से काम करने का मंत्र देने की तैयारी कर रहे हैं। संकेत हैं कि 2014 आम चुनाव से पहले तक के रोडमैप को बताने के लिए प्रधानमंत्री एक नवंबर को नवगठित कैबिनेट की बैठक बुला सकते हैं।
नई टीम को अपने मनमाफिक तैयार करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब सरकार के कार्यकाल के बचे लगभग डेढ़ साल में कुछ और बड़े फैसलों को मूर्त रूप देने की तैयारी में हैं। प्रधानमंत्री चाहते है कि मंत्रिमंडल के सदस्य इसी दिशा में काम करते हुए आगे बढ़े। बीते साढ़े तीन साल में सरकार पर महंगाई और भ्रष्टाचार की बदनामी का दाग लग गया है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने सरकार के कामकाज पर कड़े वार किए हैं।
खुद प्रधानमंत्री पर नकारेपन का आरोप लगा है। लिहाजा, नीतिगत अपंगता के दाग को धोने के लिए प्रधानमंत्री अब आगे की राह पर एक योजनाबद्ध एजेंडे के तहत चलना चाहते हैं। प्रधानमंत्री के लिए यह अब और आसान हो गया है कि क्योंकि अब नए मंत्रिमंडल में बहुमत कांग्रेस का ही है। 78 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों के सिर्फ 9 सदस्य हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री एक नवंबर की बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्यों को कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में किए वायदों को मूर्त रूप देने के लिए जोर दे सकते हैं।
साथ ही आगामी डेढ़ सालों में सरकार का लक्ष्य सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विकास में तेज रफ्तार लाने का है। इसके अलावा आम लोगों से जुड़ी सेवाओं को भी दुरुस्त करने पर सरकार ध्यान केंद्रित करने जा रही है। वहीं आर्थिक सुधारों के फैसलों को जमीन पर भी लागू करने की चुनौती सरकार के सामने है। प्रधानमंत्री इस सिलसिले में अपने सहयोगियों को निर्देश दे सकते हैं।