फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीपीएम में होगा नेतृत्व परिवर्तन, येचुरी थामेंगे कमान!

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे बुरे दौर से गुजर रही माकपा की राजनीति संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले नई करवट लेगी। माकपा की 14 अप्रैल से शुरू हो रही 6 दिवसीय पार्टी कांग्रेस में नया नेतृत्व चुना जाना तय है। वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी पार्टी महासचिव पद के सबसे मजबूत दावेदार हैं।
विज्ञापन


अगर ऐसा हुआ तो पार्टी की कमान विचारधारा की प्रतिबद्धता के लिए जाने जाने वाले करात की जगह पार्टी का नेतृत्व राजनीतिक मामलों में लचीला रुख अपनाने वाले नेता के हाथ में चली जाएगी।

पार्टी कांग्रेस में ही माकपा भविष्य की सियासत का तानाबाना बुनेगी। मसलन इसी बैठक में गठबंधन की राजनीति करने या न करने पर भी अंतिम फैसला होगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कथित सांप्रदायिक शक्तियों से मुकाबले के नाम पर जनता परिवार में शामिल रही पार्टियों में विलय पर सहमति बन चुकी है।
विज्ञापन

Trending Videos

नए नेतृत्व के साथ भावी सियासत की बनेगी रणनीति

यह देखना दिलचस्प होगा कि नई राजनीतिक परिस्थिति में माकपा गठबंधन की राजनीति पर क्या फैसला लेती है। इसके अलावा इस बैठक में पार्टी की पश्चिम बंगाल में हार के साथ देश भर में घट रहे प्रभाव पर चर्चा के साथ ही जमीन मजबूत करने की नीति तय की जाएगी।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, पार्टी कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन तय है। बतौर पार्टी महासचिव प्रकाश करात की जगह लेने वालों की दौड़ में येचुरी सबसे आगे हैं। हालांकि इसका फैसला पार्टी कांग्रेस में ही लिया जाएगा। उक्त नेता के मुताबिक, माकपा के सामने कई चुनौतियां हैं।

खासतौर से पश्चिम बंगाल में करारी हार और लोकसभा चुनाव में 2009 के मुकाबले 2014 में और बुरे प्रदर्शन ने पार्टी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश की है। इसलिए बैठक में भावी रणनीति का तानाबाना बुने जाने के अतिरिक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर में पहुंचने के कारण तलाशे जाएंगे।
विज्ञापन

विशाखापट्टनम में 6 दिवसीय पार्टी कांग्रेस 14 अप्रैल से

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, निश्चित रूप में पार्टी कांग्रेस ही यह तय करेगी कि माकपा भविष्य में बीते ढाई दशक की तरह गठबंधन की राजनीति पर फिर से दांव लगाएगी या फिर फिलहाल इससे दूर रह कर अपना घर मजबूत करेगी।

अगर कमान येचुरी के हाथ में गई तो पार्टी गठबंधन की राजनीति का दांव आजमाते रहने का फैसला करेगी।

उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका परमाणु करार मामले में यूपीए सकार से हाथ खींचने के बाद हुए लोकसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद करात को राजनीतिक चतुराई न अपनाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। तब कई नेताओं का कहना था कि यूपीए सरकार से किनारा करने के लिए यह मुद्दा उपयुक्त नहीं था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें