टूजी मामले की जेपीसी जांच रिपोर्ट में अपना असहमति नोट देने के बाद भाजपा ने अब इस मुद्दे को जनता के दरबार में ले जाने का ऐलान किया है।
यही नहीं, पार्टी ने संसदीय परंपरा के विपरीत टूजी जेपीसी की रिपोर्ट संसद में पेश होने से पहले ही सार्वजनिक रूप से इसे खारिज करने के साथ ही अपना असहमति नोट भी मीडिया को जारी कर दिया।
भाजपा ने इसे सरकार की तैयार जांच रिपोर्ट करार देते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को इसे भी संसद में फाड़ डालने की हिम्मत दिखानी चाहिए।
समिति के सदस्य यशवंत सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस को अब चुनाव में इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
बोफोर्स घोटाले की जांच के लिए गठित जेपीसी के बाद टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले पर गठित यह दूसरी ऐसी जेपीसी है जिसने उसे दिए जांच कार्य का मजाक बना कर रख दिया।
सिन्हा ने कहा कि इस जेपीसी ने सभी संसदीय परंपराओं को ताक पर रखकर जो आचरण किया है, उसके बाद अब भविष्य में कोई पार्टी या सांसद किसी भी मुद्दे पर जेपीसी की मांग करने से भी खौफ खाएंगे।
सिन्हा के साथ जेपीसी में भाजपा के सदस्य जसवंत सिंह, गोपीनाथ मुंडे, रविशंकर प्रसाद व हरिन पाठक ने चेयरमैन पीसी चाको व कांग्रेस पर जम कर हमला किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने इरादे तभी जता दिए थे जब चाको को पार्टी का प्रवक्ता बना दिया गया। जसवंत सिंह ने माना कि जेपीसी की रिपोर्ट संसद में पेश होने से पहले भाजपा सदस्यों ने उसकी जानकारी सार्वजनिक करके संसदीय परंपरा का उल्लंघन किया है।
इस पर खेद प्रकट करने के साथ ही सिंह ने दलील दी कि टूजी मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भूमिकाओं पर पर्दा डालने के लिए समिति के अध्यक्ष चाको ने सभी नियमों और परंपराओं की धज्जियां उड़ा दीं, जिसके कारण भाजपा सदस्यों को यह कदम उठाना पड़ा।
भाजपा ने कहा कि चाको ने सात माह बाद बैठक बुलाई जब जब उन्हें समिति में बहुमत होने का भरोसा हो गया। रिपोर्ट को पैरा के हिसाब से मंजूर किया जाता है, लेकिन उन्होंने अचानक उसे पारित कर दिया।