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वर्तमान सरकार ने 75 प्लस नेताओं को घोषित कर दिया है ‘ब्रेन डेड’

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यशवंत सिन्हा ने भाजपा में वरिष्ठ और दिग्गज नेताओं की उपेक्षा को लेकर मौजूदा सरकार पर खुलकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया है।
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मौजूदा शासन व्यवस्था मान रही है कि इस उम्र के लोग सरकार में जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते। सिन्हा खुद 80 साल की उम्र पार कर चुके हैं और पिछले चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था।

मुंबई में उद्योग जगत की बैठक में उन्होंने कहा, ‘26 मई 2014 को उन सभी को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया जिनकी उम्र 75 साल से अधिक थी।’हालांकि उन्होंने कहा मैने इसी उम्र में किताब लिखी है।
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वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे सिन्हा नरेंद्र मोदी के शासन और मनमोहन सिंह की पिछली सरकार में फर्क पर पूछे गये सवाल का जवाब दे रहे थे। सिन्हा ने मजाक में कहा कि उनके बेटे जयंत सिन्हा भी ‘ब्रेन डेड’ हैं।

गौरतलब है कि यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा केंद्र में वित्त राज्यमंत्री हैं। यशवंत ने मोदी के ‘मेक इन इंडिया’पहल को लक्ष्य करते हुए कहा कि ‘पहले भारत बनाओ’बाकी तो बाद में हो ही जाएगा।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे निष्ठावान पार्टी समर्थक मोदी की कैबिनेट में शामिल नहीं हैं। इस कारण कई नेताओं ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। मुरली मनोहर जोशी ने भी ‘स्वच्छ गंगा’परियोजना पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए कहा था कि यह कभी सफल नहीं होगा।

‘ललितगेट’ का उल्लेख किए बिना सिन्हा ने कहा कि सरकार को ज्यादा सक्रियता से काम करने की जरूरत है और यह भी सुनिश्चित करना है कि आने वाले संसद सत्र में कुछ काम की बातें हों। मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा।
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सिर्फ आंकड़ों में है आर्थिक सुधार

सत्ता में आने के बाद आर्थिक सुधारों का दावा करने वाली मोदी सरकार के दावों पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि आर्थिक बढ़ोतरी ‘सिर्फ आंकड़ों में ’है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई गंभीर मसले हैं जिन पर विचार किए जाने की जरूरत है।

यशवंत ने कहा कि हम मंदी से उबरे हैं। कम से कम आंकड़ों के तौर पर तो यह दिखता ही है हालांकि हमने जीडीपी आंकने के नियमों में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की प्रामाणिकता के लिए पिछले वर्षों की आर्थिक बढ़ोतरी के आंकड़ों से तुलना करने की जरूरत है।

सिन्हा के अनुसार, ‘ऐसा नहीं हो सकता कि आप एक साल का आंकड़ा तैयार करें और कहें कि आप 7.4 प्रतिशत या आठ प्रतिशत या 20 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहे हैं।’
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