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दिल्ली में सबसे ज्यादा मैली होती है यमुना

Sun, 24 Feb 2013 07:06 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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यमुनोत्री से निकलकर इलाहाबाद में संगम होने वाली यमुना देश की राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा मैली होती है। यमुना को स्वच्छ और निर्मल करने की कवायद को लेकर हुई बैठक में हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने यह आरोप लगाया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को हरियाणा, यूपी और दिल्ली के अधिकारियों के साथ बैठक करने का आदेश दिया था। इस बैठक में बचाव के लिए उठाए गए कदमों की स्थिति और आगे की तैयारी के बारे में राज्यों को मंत्रालय को सूचित करना था।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में अदालत के निर्देश के मुताबिक मिनट्स ऑफ मीटिंग को भी शामिल किया है।

बैठक में हरियाणा ने कहा है कि राज्य के पाला गांव तक यमुना के पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के तहत रहती है। यह गांव हरियाणा-दिल्ली के बॉर्डर पर स्थित है। लेकिन दिल्ली में प्रवेश करने के बाद बदरपुर में यमुना में प्रदूषण बहुत अधिक हो जाता है। क्योंकि तमाम गैर-शोधित और आंशिक शोधित सीवेज नाले नदी में गंदगी गिराते हैं।
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इस बैठक में केंद्रीय जल संसाधन, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एमसीडी, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड, आईआईटी दिल्ली, रुड़की समेत हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में दिल्ली गवर्नर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

हरियाणा ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके राज्य में नदी को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी औद्योगिक यूनिट नहीं प्रभावित करती। क्योंकि कोई भी गैर-शोधित स्तर की नहीं है।

बैठक में यूपी के मुख्य सचिव ने कहा कि यमुना की सफाई के संबंध में दिया गया सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर्फ दिल्ली तक न सीमित रखा जाए। क्योंकि यमुना उद्गम स्थल से निकलकर इलाहाबाद तक जाती है। दिल्ली में मैली हुई यमुना की सफाई के हर प्रयास में उत्तर प्रदेश सरकार भी शामिल है।

दिल्ली से वृंदावन, मथुरा, आगरा और फिर इलाहाबाद पहुंचने वाली यमुना का पानी स्वच्छता के निर्धारित मानकों पर नहीं रहता। नदी को गंदा करने वाली तमाम औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और 25 यूनिटों को बंद भी करवाया गया है।

गौरतलब है कि आईआईटी दिल्ली, रुड़की ने यमुना की सफाई के लिए बनाई जाने वाली योजना के लिए अधिकृत आंकड़े मांगे हैं। फिलहाल दोनों की ओर से इस मसले पर कोई राय नहीं दी गई है। मंत्रालय इस समस्या का हल निकालने के लिए अगली बैठक मार्च के पहले सप्ताह में तीनों राज्यों समेत सभी अधिकारियों के साथ करेगा।
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