महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न की एफआईआर किसी भी थाने में और किसी भी वक्त दर्ज कराई जा सकेगी। केंद्र ने सभी थानों को यह निर्देश दिया है कि पीड़ित महिला जिस थाने में चाहे एफआईआर दर्ज करा सकती है। लिहाजा पुलिस इन मामलों में थाने की सीमा और समय की परवाह नहीं करे। एक बार एफआईआर दर्ज हो जान के बाद उसे घटनास्थल से संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
महिलाओं में सुरक्षा का विश्वास लाने के मकसद से 100 नंबर की तर्ज पर तीन अंकों के ऐसे इमरजेंसी नंबर की तकनीक लागू करने का फैसला किया गया है जो देशभर में काम करेगा। इसका मकसद यह है कि दूरदराज के इलाकों की महिला भी इस नंबर का इस्तेमाल कर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपनी शिकायत पहुंचा सकती हैं।
महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न पर अध्यादेश जारी होने के बाद कैबिनेट सचिवालय ने पुलिस व्यवस्था, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, शिक्षा सहित प्रशासनिक सुधार संबंधी 27 निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान को सुनिश्चित करेंगे।
दरअसल कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने पिछले एक हफ्ते में सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ बैठक कर इसका ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इनमें उन बदलाव को शामिल किया गया है जिनमें कानून बदलने की जरूरत नहीं थी। सरकार ने सात अहम मंत्रालयों को तय समयसीमा के भीतर इसके पालन की जिम्मेदारी दी गई है। यह मंत्रालय हर महीने प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिव को इसकी रिपोर्ट देंगे।
इन प्रशासनिक सुधारों के तहत पुलिस और अर्धसैनिक बलों को महिलाओं की प्रति संवेदनशील बनाने के नए उपायों को लागू करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत उन पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को कानून के तहत सख्त सजा देने की बात कही गई है कि जो महिलाओं के मामले में भेदभाव बरतते हैं।
खास तौर पर हवलदार स्तर के कर्मियों और गश्त लगाने वाले पुलिस अधिकारियों को महिलाओं को साथ पुलिसिया अंदाज में पेश नहीं आने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यहां तक कि पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के महिला संबंधी संवेदनशील रुख को उसकी गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में शामिल करने की बात कही गई है।
कैबिनेट सचिव ने गृह मंत्रालय को कहा है कि सभी राज्यों में महिला पुलिस की भर्ती में इजाफे के लिए अलग से बजट की पेशकश करें ताकि इस काम में किसी तरह की देर नहीं हो। इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को कहा गया है कि वह उत्पीड़न की शिकार महिला को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने के उपाय करें।
इसके लिए फिलहाल 100 अस्पतालों को चुना गया है जहां पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही लागू किया जा रहा है। इसके अलावा पुलिस की गश्त बढ़ाने और मुमकिन जगहों पर सीसीटीवी लगाने जैसे उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।