18 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं सहमति से शारीरिक संबंध बना सकती हैं और उसके लिए अदालत की मंजूरी की जरूरत नहीं है।
दिल्ली की एक अदालत द्वारा कुछ मामलों में महिलाओं द्वारा पहले सहमति से शारीरिक संबंध बनाने और फिर रेप का आरोप लगाए जाने के प्रचलन की बात कहे जाने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि रेप और सहमति से संबंध के बीच संशय है।
उनका यह बयान कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि महिलाओं द्वारा पहले सहमति से शारीरिक संबंध बनाने और फिर रेप का आरोप लगाए जाने का प्रचलन बढ़ रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 'हां ऐसा होता है कि महिलाएं पहले सहमति से संबंध बनाती हैं और फिर सुविधा के अनुसार बदल जाती हैं। मुझे यह सही नहीं लगता। न्यायाधीश ने फैसले में जो कहा, मैं उस पर टिप्पणी नहीं कर सकती लेकिन उससे अलग हटते हुए यह कहना चाहूंगी कि यह हम सभी महिलाओं के सामने चुनौती है।
पहली बात यह कि महिलाओं को सहमति से संबंध बनाने का हक है। उन्होंने कहा कि अगर आप 18 साल से बड़ी हैं तो किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। आपको सहमति से सेक्स करने का अधिकार है। हमें इसके लिए अदालत के फैसले या मंजूरी की जरूरत नहीं है।
रेणुका चौधरी ने यह भी कहा कि रेप आपसी सहमति से बनाए गए संबंध नहीं होते।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की एक अदालत ने यह कहते हुए दुष्कर्म के आरोपी एक शख्स को बरी कर दिया कि लड़कियां प्रेमी के साथ अपनी मर्जी से भागती हैं, लेकिन माता-पिता के कोप से बचने की खातिर वे बाद में फर्जी मुकदमे दर्ज करा देती हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा था कि शारीरिक सुख तलाशते हुए वे लड़कियां अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ भागती हैं और घर वापस आने पर बड़े सहज तरीके से अपहरण और रेप की कहानी गढ़ती हैं, ताकि अपने माता-पिता के कोप से बच सकें।