मध्यप्रदेश का अनूपपुर रेलवे स्टेशन यूं तो दूसरे रेलवे स्टेशनों जैसा ही है, लेकिन स्टेशन पर कुलियों की भीड़ में एक चेहरा बरबस ही यात्रियों का ध्यान खींच लेता है।
यह महिला सिर पर दो बड़े-बड़े ब्रीफकेस उठाए और कंधे पर एक बैग डाले नजर आती है। कुली की ड्रेस पहनी इस महिला का नाम है फूल बाई।
वह चार- पांच साल से कुली का काम कर रही हैं। फूल बाई का एक बेटा और एक बेटी हैं। बच्चों की उम्र 14-15 साल के लगभग है।
पति की मौत के बाद फूल बाई ही परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा उठा रही हैं।
फूल बाई बताती हैं, "पांच साल पहले पेट की पथरी की बीमारी का ठीक से इलाज नहीं होने से पति की मौत हो गई थी। उसके बाद मुझे उनकी जगह कुली की नौकरी मिली।"
फूल बाई कहती हैं कि यात्रियों का सामान उठाने से जो कमाई होती है, उसी से गुजर-बसर होती है। रेलवे से उन्हें कोई सहायता नहीं मिलती है।
फूल बाई के बच्चे पहले स्कूल जाते थे, लेकिन अब उनका स्कूल छूट गया है। बच्चों के स्कूल नहीं जाने के सवाल पर वो चुप हो जाती हैं।
यह पूछने पर कि स्टेशन पर कोई और भी महिला कुली है, फूल बाई बताती हैं, "दो और महिलाएँ हैं। वो भी यात्रियों का बोझा उठाकर गुजर-बसर कर रही हैं।"