तेलंगाना मुद्दे पर अपने ही सांसदों का विरोध झेल रही यूपीए सरकार की परेशानी भाजपा ने और बढ़ा दी है।
पार्टी ने दो टूक कहा है कि वह मानसून सत्र में एक भी विधेयक हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित नहीं होने देगी। इसके अलावा पार्टी ने खाद्य सुरक्षा विधेयक को छत्तीसगढ़ मॉडल की तर्ज पर तैयार करने की शर्त अलग से रख दी है।
सोमवार को सत्र के पहले ही दिन भाजपा ने अपने तेवरों से सरकार को चिंता में डाल दिया है। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने साफ कर दिया कि इस सत्र में पार्टी हंगामे के बीच बिना चर्चा एक भी विधेयक पारित नहीं होने देगी।
इसकी जानकारी देते हुए पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भाजपा हमेशा सभी मुद्दों पर चर्चा की पक्षधर है। मगर समस्या यह है कि सरकार अपने ही सांसदों को नहीं संभाल पा रही है।
सत्र से पहले पीएम ने सदन को शांतिपूर्ण ढंग से चलने देने की अपील की। इसका पालन विपक्ष ने तो किया, मगर खुद सत्ता पक्ष के लोग वेल में आ गए।
शाहनवाज ने कहा कि हमेशा विपक्ष पर हंगामा खड़ा कर कार्यवाही न चलने देने की तोहमत लगाने वाली सरकार को अपने सांसदों को संभालना चाहिए। खाद्य सुरक्षा विधेयक के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पार्टी इसके विरोध में नहीं है।
मगर हम चाहते हैं कि इसके लिए सरकार छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाए और अन्य दलों के सुझावों को भी विधेयक में शामिल करे। इस दौरान प्रवक्ता ने सरकार पर चर्चा से भागने का भी आरोप लगाया।