राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के डिप्टी मैनेजर सुरेन्द्र शर्मा को भ्रष्टाचार करने पर अजमेर की विशेष अदालत ने पूरे परिवार सहित छह साल की सजा सुनाई है।
अदालत ने शर्मा के परिजनों को बतौर डिप्टी मैनेजर भ्रष्टाचार करने के लिए प्रेरित करने का आरोपी माना है। आदेश के बाद शर्मा व उनकी पत्नी अरूणा, पुत्र गौरव और पुत्री गरिमा को अजमेर केन्द्रीय कारागृह भेज दिया गया। अजमेर में हुए पशु आहार घोटाले की जांच में शर्मा के पास आय से अधिक संपत्ति पाई गई थी।
अजमेर में भ्रष्टाचार मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश फूलचंद झाझड़िया ने शर्मा सहित सभी परिजनों को 25-25 लाख रुपए का जुर्माना भी किया है।
अदालत ने आदेश में कहा है कि एक पढ़ा-लिखा परिवार अगर काली कमाई को सहज, सरल तथा सुविधापूर्ण बनाने के लिए जानबूझकर उत्प्रेरित करता है, तो उन्हें निर्दोष नहीं माना जा सकता है।
मामले के तहत एसीबी ने 6 अगस्त, 2010 को शर्मा को एक लाख रुपए के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद शर्मा के जयपुर के वैशाली नगर स्थित आवास व विभिन्न बैंकों के लॉकरों से करीब आठ करोड़ नकद मिले थे।
साथ ही, 9 किलो 826 ग्राम से ज्यादा सोना भी पाया गया। ये बैंक लॉकर शर्मा के पुत्र, पत्नी व पुत्री के नाम से थे। उनके खातों में भी भ्रष्टाचार की कमाई जमा करवाई गई थी।
भ्रष्टाचार से आम आदमी त्रस्त
अदालत ने कहा कि कैंसर की तरह समाज में फैल रहे भ्रष्टाचार से आम आदमी त्रस्त है। ईमानदारी के असाला अन्य साधनों से धन एकत्रित करने की लालसा ने समाज के मूल्यों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
ऐसी प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए कठोर दंड दिया जाना जरूरी है ताकि भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन नहीं मिले।