एनडीए व लेफ्ट समेत लगभग पूरा विपक्ष रिटेल में एफडीआई पर वोटिंग के नियमों के तहत चर्चा कराने पर अड़ गया है। संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा बुलाई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इससे बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिन संसद के चलने के बहुत कम आसार हैं।
खास बात यह है कि इसी मुद्दे पर यूपीए सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को बैठक में कोई खास तवज्जो नहीं मिली। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय को छोड़कर किसी भी दल ने यह मामला नहीं उठाया। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि संसद को सुचारु रूप से चलाने की शर्त यही है कि सरकार रिटेल में एफडीआई पर नियम-184 के तहत चर्चा कराने के लिए राजी हो जाए।
बैठक में भी भाजपा समेत एनडीए के साथ ही लेफ्ट ने भी सरकार से दो टूक कह दिया कि इस मसले पर मतदान के नियमों के तहत चर्चा करानी होगी। लेकिन सरकार विपक्ष की इस मांग को मानने के लिए सहमत होती नहीं दिख रही है। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि अगले एक-दो दिन में सभी दलों से चर्चा के बाद इसका हल निकाल लिया जाएगा। इससे साफ है कि संसद के अगले एक-दो दिन हंगामेदार हो सकते हैं। भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने तो कह भी दिया कि लगता है एक-दो दिन संसद नहीं चलेगी।
दरअसल, एनडीए व लेफ्ट रिटेल में एफडीआई मुद्दे पर सरकार के साथ ही उन दलों को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश में हैं जो संसद के बाहर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार के साथ हैं। इससे सपा और बसपा को मुश्किल हो सकती है। इसलिए एनडीए व लेफ्ट अविश्वास प्रस्ताव की बजाए मतदान के नियमों के तहत चर्चा की मांग कर रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि सभी दलों ने सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने का भरोसा दिया है। बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा सत्र 20 दिसंबर तक चलेगा। इसमें रिटेल में एफडीआई के अलावा महंगाई, भ्रष्टाचार, घरेलू गैस सिलेंडर जैसे मसले भी उठेंगे। भाजपा अब संसद हमलों के दोषी अफजल गुरु को भी फांसी दिए जाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी में है।