ट्रेन से देशभर के पहाड़ी क्षेत्रों का भ्रमण करने वाले यात्रियों को और सुरक्षित यात्रा का तोहफा देने की तैयारी डीरेका कर रहा है।
सब कुछ ठीक रहा तो पहाड़ी क्षेत्रों में चढ़ाई के दौरान इंजन से डिब्बों का संपर्क टूटने और पटरियों पर पहियों के फिसलने की घटना बीते जमाने की बात हो जाएगी। डीरेका ने इस समस्या का हल ट्रेन के बीच में भी एक इंजन लगाकर निकाला है।
पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाली ट्रेनों में सामान्यत: ट्रेन के अगले और पिछले छोर पर इंजन लगाए जाते थे। अब बीच में भी इंजन लगने के बाद कुल इंजनों की संख्या तीन हो जाएगी।
खास बात यह है कि ट्रेन के केवल आगे के इंजन में ही पायलट बैठेगा। वह रिमोट से बाकी के दो इंजनों को संचालित करेगा।