नक्सल प्रभावित जिलों के 50000 युवाओं को तीन वर्ष में सरकार ने रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने रोशनी कार्यक्रम का आगाज किया है।
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को इसकी शुरुआत की।
उन्होंने बताया कि इसके जरिए खास बात यह है कि योजना में पचास फीसदी भागीदारी युवतियों के लिए आरक्षित की गई है।
पहले चरण में नौ राज्यों के 24 जिलों का चयन किया गया है। इसमें उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला भी शामिल है।
इन जिलों के युवाओं को पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें विभिन्न राज्यों की गैर सरकारी कंपनियों में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक पहले चरण में सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को चुना गया है।
इसमें उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के अलावा आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम, बिहार के गया और जमुई, मध्य प्रदेश का बालाघाट, पश्चिम बंगाल का पश्चिम मिदनापुर और महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली के अलावा छत्तीसगढ़ के पांच व झारखंड और ओडिशा के छह-छह जिलों को शामिल किया है।
योजना के लिए केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस योजना में राज्य सरकारों की अहम भूमिका रहेगी।
योजना पर होने वाले कुल खर्च में 75 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र और 25 फीसदी की हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होगी।
उन्होंने बताया कि रोशनी कार्यक्रम के तहत चयनित युवक व युवतियों को तीन से छह माह का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें नौकरियों के लिए नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे।
जयराम के मुताबिक सरकार का मकसद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवा जिनकी उम्र 18 से 25 वर्ष की है और उनकी शिक्षा आठ से 12वीं क्लास तक ही हुई है। उन्हें रोजगार उपलब्ध कराकर स्वावलंबी बनाना है।
इसके पहले सरकार ने डेढ़ वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर में हिमायत कार्यक्रम की शुरुआत की थी। जिसके तहत अब तक 8300 युवक व युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।
इस वर्ष हिमायत के जरिए 19000 लोगों को प्रशिक्षण के बाद नौकरियां दिलाने का लक्ष्य रखा गया गया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य हिमायत के जरिए पांच वर्षों में एक लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है।