पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों का माना जाता है, लेकिन बहुत से मामलों में यह जोड़ी अलग-अलग कारणों से टूट जाती है। लेकिन यह शायद अपने तरह का पहला मामला है।
मुंबई की एक अदालत ने एक मामले में भारतीय महिलाओं के लिए मंगलसूत्र को सबसे अहम बताते हुए पीड़ित महिला को तलाक की मंजूरी दे दी।
नर्स मेधा रायकर ने अपने पति हरिश पर आरोप लगया था कि उसने अपना कर्ज चुकाने के लिए उसका मंगलसूत्र गिरवी रख दिया।
इसके अलावा मेधा का कहना था कि उसके बेरोजगार और शराब के आदी पति के किसी दूसरी महिला से भी संबंध हैं।
मेधा और हरेश का विवाह 4 अप्रैल 2004 को हुआ था। शादी के समय से ही हरेश उग्र स्वभाव का था। मेधा को उम्मीद थी कि समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
15 2009 अक्टूबर को मेधा ने हरेश के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन बाद में दोनों के रिश्ते सुधर गए। लेकिन ज्यादा दिनों तक संबंध सही नहीं रहे।
और हरीश की ज्यादतियों से परेशान मेधा ने 22 मार्च, 2011 को तलाक की याचिका दायर कर दी। याचिका के मुताबिक, हरीश ने अक्टूबर 2004 में मेधा से मंगलसूत्र हथियाकर गिरवी रखवा दिया।
बांद्रा की फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश रूकमे ने कहा कि मंगलसूत्र भारतीय महिलाओं के लिए सबसे कीमती गहना होता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के मंगलसूत्र को गिरवी रखता है तो इससे साफ है कि वह एक जिम्मेदार पति नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट ने हरेश को खुद पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए कई बार बुलाया लेकिन वह नहीं आया। अदालत ने तलाक की मंजूरी के साथ ही हरेश को दोनों बच्चों को दो हजार रुपए प्रति माह भुगतान का आदेश भी दिया।