रेल घूस कांड मामले में पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को गवाह बनाने पर तीन अभियुक्तों ने आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि अगर बंसल को गवाह बनाया गया है, तो सभी अभियुक्तों को रिहा कर सीबीआई को जांच जारी रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई कोर्ट की विशेष न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष अभियुक्त राहुल यादव, समीर संधीर व सुशील डागा की जमानत पर जिरह के दौरान उनके अधिवक्ता ने कहा कि, यदि सीबीआई बंसल को गवाह के रूप में देखना चाहती है तो अदालत को सभी अभियुक्तों को रिहा कर सीबीआई को जांच जारी रखने का निर्देश दिया जाए।
अदालत ने उनके तर्कों को सुनने के बाद तीनों की जमानत पर फैसला 9 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। बचाव पक्ष की दलील है कि बिना बंसल की रजामंदी से इस प्रकार का काम नहीं हो सकता था। इसलिए उनका नाम गवाहों की सूची में नहीं होना चाहिए।
सीबीआई के रवैये पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अदालत ने मामले में दो अभियुक्तों सीवी वेणुगोपाल और एमवी मुरली कृष्णन को गिरफ्तार न करने पर आपत्ति जताते हुए सीबीआई से जवाब तलब किया।
अदालत ने कहा कि, जांच एजेंसी के अनुसार इन दोनों की भूमिका भी गिरफ्तार तीनों अभियुक्तों के समान ही है तो फिर उनको गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कहा यह काफी अजीब तर्क है कि इन दोनों को गिरफ्तार न करना कोई बड़ी बात नहीं है। यदि ऐसा है तो इन तीनों को भी गिरफ्तार करने का क्या औचित्य था।