रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी द्वारा अंतिम क्षणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा से खुद को अलग कर लेने के बाद से राजनीतिक और कॉरपोरेट हलकों में कानाफूसी तेज हो गई है। इस बात की चर्चा जोरों पर है कि देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट हाउस और मौजूदा एनडीए सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।
मुकेश अंबानी ने प्रतिनिधिमंडल से हटने के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को जानकारी दे दी थी। अंबानी 1 सितंबर को भारत-जपान बिजनेस लीडर्स फोरम (आईजेबीएलएफ) की बैठक में शामिल होने टोक्यो जा रहे कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
अंबानी के अलावा इस प्रतिनिधिमंडल में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी, भारती एंटरप्राइजेज के सुनील भारती मित्तल, एस्सार ग्रुप के प्रमुख शशि रूईया, विप्रो चेयरमैन अजीम प्रेमजी और आईसीआईसीआई बैंक की चीफ एक्जीक्यूटिव चंदा कोचर शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह कारोबारी प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते बढ़ाने में प्रधानमंत्री के प्रयासों को समर्थन देगा। केंद्र सरकार ने भी मुकेश अंबानी द्वारा प्रतिनिधिमंडल से हटने के पीछे कोई कारण नहीं बताया है।