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अहम मौकों पर देर से क्यों बोलते हैं मोदी?

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ट्वीटर पर अमिताभ बच्चन के बाद सबसे ज्यादा फोलोवर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही हैं, फेसबुक पर भी उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है तो इसकी एक प्रमुख वजह उनकी सोशल मीडिया पर लगातार सक्रियता भी मानी जाती है।
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मोदी हर खास मौके या महत्वपूर्ण मुद्दे पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना बखूबी जानते हैं लेकिन उनकी यह सक्रियता उस समय सवाल खड़े कर देती है जब किसी सुलगते और संवेदनशील मुद्दे पर वह बोलना जरूरी नहीं समझते या देर से पहल करते हैं। तब भी नहीं, जब पूरे देश में उस मुद्दे पर बहस छिड़ी हो और लोग अपने सक्रिय प्रधानमंत्री से किसी बयान की उम्मीद कर रहे हों।

और तब भी नहीं जब घर वापसी, लव जिहाद, दादरी कांड जैसे गैरजरूरी मुद्दों पर उनकी ही पार्टी के लोग उनकी सरकार की विश्वसनीयता को भी दांव पर लगा देने पर अमादा हों। मोदी की चुप्पी टूटती है तो तब जब आंच उनकी छवि तक पहुंचने लगती है।
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हैरत की बात है कि मोदी का ये रवैया बहुत कुछ उनके पूर्ववती मनमोहन सिंह जैसा ही है जिन पर खुद मोदी ही मौन रहने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन मनमोहन सिंह व्यक्तित्व से मौन थे मोदी नहीं।

दलित छात्र की मौत पर भी साधे रखी चुप्पी

हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमूला की मौत पर देश में राजनीतिक घमासान चरम पर है तो भावनाएं उफान पर। मामला कितना संवेदनशील है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके एक मंत्री के ‌खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो चुका है, तो चिंगारी उनकी चहेती मंत्री स्मृति इरानी तक भी पहुंच गई है।

हमेशा की तरह मोदी ने इस मुद्दे पर चुप्पी तब तोड़ी जब विरोधियों ने इसे भुनाने की पूरी तैयारी कर ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैदराबाद पहुंचकर दलितों और छात्रों को साथ होने का संदेश दे चुके थे तो दिल्‍ली में उनकी नाक के नीचे दम करने वाले केजरीवाल भी मोर्चा खोलने की तैयारी में थे।

घटना 17 जनवरी की थी और इसने तुरंत पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। जिस सोशल मीडिया पर मोदी हमेशा सक्रिय रहते हैं रोहित की हत्या की प्रति‌क्रिया सबसे ज्यादा उसी सोशल मीडिया पर हुई लेकिन मोदी मौन रहे।

18 जनवरी को उन्होंने ट्वीट किया भी तो फसल बीमा के मुद्दे पर रोहित की मौत पर नहीं। 19 जनवरी को मोदी असमी जापी (हैट) लगाए गुवाहाटी में मुस्कराते चेहरे के साथ सामने आए। उस दिन भी उन्होंने ट्वीटर पर अपनी बात रखी तो पूर्वोत्तर में अपनी रैली और यहां के विकास पर।

विरोधियों ने मोदी की चुप्पी पर साधा निशाना

रोहित मुद्दे पर उनकी चुप्पी बदस्तूर जारी रही जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हैदराबाद में रोहित की मां से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। इस बीच मामला लगातार तूल पकड़ता रहा और विरोधी गोलबंद होते रहे।

अगले दिन 20 जनवरी को जब पूरा देश उम्‍मीद कर रहा था कि मोदी अब चुप्पी तोड़ेंगे तो भी वह चुप रहे। हां एक निजी मीडिया ग्रुप के मालिक की जीवनी के विमोचन करने के अवसर पर उनकी उपस्थिति जरूर दिखी।

ट्विटर पर भी उनकी सक्रियता बदस्तूर बनी रही और पाकिस्तान में पेशावर की बचा खान यूनिवर्सिटी पर हुए आतंकवादी हमले में उन्होंने अपना शोक जताकर पाकिस्तान के प्रति समर्थन जताने में देर नहीं की। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बधाई देना भी वो नहीं भूले।
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सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय रहते हैं प्रधानमंत्री

रोहित की आत्महत्या के मुद्दे पर सरकार की ओर से केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्‍मृति इरानी जरूर सामने आई। 21 जनवरी को मोदी ने राजस्‍थान के एक शोध छात्र द्वारा तैयार की गई श्री दुर्गा सप्तशती का विमोचन भी किया लेकिन रोहित के मुद्दे पर उनकी खामोशी रही।

इस बीच हैदराबाद में राजनीतिक गर्माहट जारी रही और मृतक छात्र रोहित की मां ने छात्रों को संबोधित किया। आखिर तमाम सवालों के बीच मोदी ने 22 जनवरी को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी लखनऊ में अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में।

रोहित पर अपना पहला बयान देते हुए मोदी ने कहा कि, "इस घटना के पीछे जो भी वजह रही हो जो भी राजनीति हो रही हो लेकिन एक मां ने अपना बेटा खो दिया है। मैं उसके परिजनों का दर्द और उनकी मनोस्थिति समझ सकता हूं।" शायद दलित छात्र रोहित पर बोलने के लिए अंबेडकर यूनिवर्सिटी से अच्छी जगह और इससे बेहतर टाइमिंग नहीं हो सकती ‌थी?
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