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जानिए, चीनी घुसपैठ पर क्यों चुप हैं मोदी?

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यूपीए के कार्यकाल में चीन की घुसपैठ पर शोर मचाने वाली भाजपा अब एलएसी पर चीनी हरकतों को ज्यादा तूल नहीं दे रही है। बतौर विपक्ष इस मुद्दे पर मनमोहन सरकार को कमजोर बताने वाली एनडीए को सत्ता संभालने के बाद चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की वास्तविकता भी समझ आ गई है।
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31 जुलाई को रिटायर हो रहे सेना प्रमुख बिक्रम सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री अरुण जेटली को इस सच्चाई से अवगत कराया है कि एलएसी पर ठोस लकीर खींचे बिना घुसपैठ की घटना होती रहेगी।

जनरल सिंह ने सरकार को यह भी बताया है कि चीनी सेना के घुसपैठ पर मीडिया में शोर शराबे को कम कर एलएसी पर ठोस लकीर खींचने की दिशा में गंभीर पहल करना जरूरी है।
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सेना के सूत्रों ने बताया कि घुसपैठ पहले भी होती थी, जिन्हें सीमा पर तैनात कमांडर आपस में सुलझा लिया करते थे। लेकिन अब बात मीडिया में उछल जाने के बाद वही कमांडर समाधान के लिए दिल्ली स्थित मुख्यालय की तरफ देखने लगते हैं। जबकि चीनी कमांडर को ऐसी कोई मजबूरी नहीं।
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भारतीय सेना भी जाती है उस तरफ

अधिकारी के मुताबिक इसी वजह से सेना प्रमुख ने सरकार को मीडिया को इसके मायने समझाने की सलाह भी दी है। दरअसल, एलएसी पर 19वीं सदी में खींची गई दो काल्पनिक लकीरें हैं, जिनमें से एक को भारत और दूसरे को चीन सही मानता है।

ऐसे में सिर्फ चीन ही नहीं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सेना भी उस ओर चली जाती है क्योंकि करीब 4000 किलोमीटर एलएसी पर काल्पनिक लकीर का सटीक ध्यान रखना दोनों पक्ष के लिए संभव नहीं है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री स्तर पर शुरुआती प्रजेंटेशन के दौरान हुई बातचीत में यह बात भी उठी कि चीन इस हालात का फायदा उठाकर कई इलाकों में जान-बूझकर शैतानी भी करता है। लेकिन दोनों देशों के बीच हुए कई करारों के तहत बातचीत के बाद चीनी सेना वापस भी चली जाती है।

सेना सूत्रों के मुताबिक चीन को भी मालूम है कि उसे आज नहीं तो कल एलएसी का मसला सुलझाना ही होगा। यही वजह है कि वह अपने नक्शे में अरुणाचल जैसे इलाके को अपने कब्जे में दिखाकर भारत को दबाव में रखने की रणनीति अपना रहा है ताकि जब कभी भी सीमा पर बात होगी चीन का पलड़ा भारी रहे। अब चीन इस बात से सजग है कि वह भारत से बंदूक के जरिए एलएसी विवाद को नहीं सुलझा सकता।
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मोदी सरकार पर कांग्रेस का वार

संसद के चालू सत्र के बचे दिनों में मोदी सरकार को चीन और पाकिस्तान की ओर से सीमा पर मिल रही कड़ी चुनौतियों के मुद्दे पर विपक्ष के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा है कि आखिर पाकिस्तान और चीन को ललकारने वाली कूटनीति और आवाज कहां चली गई है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार को संसद में चीनी घुसपैठ को लेकर जवाब देना होगा।

मंगलवार को कांग्रेस ने पिछले हफ्ते लद्दाख में हुई चीनी घुसपैठ को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार से सवाल किया है कि एनडीए सरकार की ललकारने वाली कूटनीति आखिर कहां गई।

पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने ट्वीट किया है, ‘डेमचोक लद्दाख में चीन की घुसपैठ से भारतीय चरवाहों के ठिकानों को कथित तौर पर पीएलए ने तोड़ दिया। इस सरकार की ललकारने वाली कूटनीति कहां है।’ गौरतलब है कि पिछले हफ्ते लद्दाख में भारतीय सीमा में चीनी चरवाहों के दाखिल होने की बात मानते हुए सरकार ने कहा कि दोनों देशों की थल सेनाओं के बीच हुई एक फ्लैग मीटिंग के बाद लौट गए।
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