उत्तर प्रदेश की हाई-प्रोफाइल सीट और गांधी परिवार का किला अमेठी को लेकर कांग्रेस में क्या इन दिनों कुछ चिंता दिख रही है? कांग्रेस का कोई भी नेता खुलकर भले इस बारे में कुछ न कहे, लेकिन वरिष्ठ नेता दबी जबान से मान रहे हैं विपक्ष के हमले डरा भले न रहे हों, लेकिन चिंता जरूर पैदा कर रहे हैं।
इन नेताओं को पूरा भरोसा है कि राहुल गांधी लगातार तीसरी बार अमेठी से जीतने में कामयाब रहेंगे, लेकिन उन्हें यह डर जरूर है कि गांधी परिवार के युवराज की जीत का मार्जिन इस बार कुछ घट सकता है।
इस डर और चिंता के पीछे वजह भी है। राहुल की मां और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले हफ्ते अमेठी जाकर दस साल में अपनी पहली रैली को संबोधित किया।
सोनिया को करनी पड़ी रैली
भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उन्होंने दस साल पहले अपना बेटा उन्हें सौंपा था, जैसे इंदिरा गांधी ने अपना बेटा अमेटी को दिया था। उन्होंने कहा कि राहुल में अपना विश्वास बनाए रखिए।
सोनिया ने रैली में कहा, "जिस तरह इंदिराजी ने मेरे पिता राजीव जी को कई साल पहले आपको दिया था, उसी तरह राहुल को मैंने 2004 को आपको दिया और उम्मीद है कि उनके लिए आपका प्रेम आगे भी जारी रहेगा।"
यह गांधी परिवार की तरफ से उठाया गया अजीब कदम है, क्योंकि इससे पहले वो सिर्फ नामांकन भरने से पहले रोड शो तक सीमित रहे हैं और चुनाव प्रचार का जिम्मा स्थानीय नेता और प्रियंका गांधी ने संभाला है।
मोदी ने फिर ली चुटकी
दस साल में पहली बार हुई सोनिया गांधी की रैली ने भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी का ध्यान भी खींचा, जो गांधी परिवार पर लंबे वक्त से हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल अमेठी का ख्याल नहीं रख सकते, तो देश का क्या रखेंगे?
उन्होंने पूर्वोत्तर में एक रैली में कहा, "सोनिया जी भावनात्मक अपील कर अपने बेटे के लिए वोट मांग रही हैं...जाहिर है, उन्हें भी अब तस्वीर साफ दिखने लगी है।" कांग्रेसी नेताओं की चिंता गलत नहीं है।
2012 के विधानसभा चुनावों में अमेठी में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है और उसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास, भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने चुनावी जंग और मुश्किल बना दी है।
राहुल की जीत का मार्जिन दांव पर
देश भर में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही कांग्रेस को अब यह चिंता सता रही है कि बोलने में उस्ताद माने जाने वाले दोनों विरोधी युवराज की चमक कुछ कम न कर दें।
हमला बोलने में सबसे आगे कुमार विश्वास हैं, जो पिछले तीन महीने से अमेठी में रह रहे हैं। उन्होंने यहां एक मकान किराए पर ले लिया है और खुद को सबसे आगे बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब 16 मई को वोट गिने जाएंगे, तो नया इतिहास बनेगा।
विश्वास का कहना है, "मैं ही यहां असल उम्मीदवार हूं, क्योंकि लोगों को अकेले मुझसे उम्मीद है। राहुल गांधी यहां दस साल से सांसद हैं और सड़क-बिजली की हालत देख लीजिए।"
कुमार विश्वास, स्मृति आक्रामक मूड में
कुमार विश्वास ने राहुल के जीजा रॉबर्ट वाड्रा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि रॉबर्ट की जमीन से आसमान पर पहुंचने की कहानी हर उस नागरिक के गाल पर तमाचा है, जो कानून का पालन करता है।
एक सूत्र ने बताया कि प्रियंका गांधी भी करीबी चिंता स्वीकार कर रहे हैं। इसका एक कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हजारों कार्यकर्ता भी हैं, जो इन दिनों भाजपा उम्मीदवार के लिए वोट मांगने की खातिर गांव-गांव घूम रहे हैं।
टीवी बहू से राजनीति की खिलाड़ी बनीं स्मृति भी पसीना बहा रही हैं। उन्होंने यहां रहने के लिए एक कमरे का मकान लिया है। उनकी उम्मीद 'मोदी लहर' पर टिकी है।
प्रियंका ने मां को आगाह किया
अपने भाई के लिए चुनाव प्रचार संभालने वाली प्रियंका ने इलाके में आरएसएस की बढ़ती गतिविधि को लेकर अपनी मां सोनिया गांधी के पास संदेश भी भेजा है। यही वजह है कि सोनिया को दस साल में पहली बार अमेठी में रैली करने की जरूरत पड़ी।
कांग्रेस कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती, इसलिए स्थानीय स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। किशोली लाल शर्मा को एक बार फिर चुनाव प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है, जबकि मनोज मट्टू को भी शामिल किया गया।
जाहिर है, पार्टी पूरा जोर लगाना चाहती है। जब राहुल ने नामांकन दाखिल किया, तो उसकी तैयारियों ने फिर अंदाजा दिया कि युवराज का मामला खास है और खास ही रहेगा।
क्या किला रहेगा या ढहेगा?
इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत दुबे राहुल का प्रचार देख रहे हैं। अमेठी का एक दौरा यह साबित करने के लिए काफी है कि इस इलाके में विकास की बातें, हकीकत से मेल नहीं खातीं।
दिल्ली और दूसरे इलाकों से यहां पहुंचे लोग कमर तोड़ने वाले सफर और बिना बिजली की रातों का जिक्र करते हैं और विपक्षी दल इन्हीं चीजों का फायदा उठाना चाहते हैं।
राहुल, सोनिया और प्रियंका गांधी के लिए यह नई चिंता है, जिससे अब तक वो दूर रहते थे। 7 मई को वोटिंग होनी है और कांग्रेसियों को डर सता रहा है कि इस बार किले पर ज्यादा आक्रामक हमला हो सकता है।