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जानिए, अमर-जया क्यों बढ़ा रहे मुलायम से नजदीकियां

Wed, 06 Aug 2014 07:44 AM IST
कृष्णेंदु कुमार/अमर उजाला, रामपुर
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रालोद के टिकट पर लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके अमर सिंह व जयाप्रदा की नजर अब यूपी में नवंबर माह में होने वाले राज्यसभा के चुनाव पर है। नवंबर माह में यूपी से राज्यसभा के दस सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
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राज्यसभा चुनावों को देखते हुए अमर सिंह सपा मुखिया मुलायम सिंह से अपनी नजदीकियां बढ़ा रहे हैं। अगर बात बन गई तो वह अपने साथ जयाप्रदा के लिए भी राज्यसभा में सीट पक्की करा सकते हैं, लेकिन इस राह में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां बन सकते हैं।

गौरतलब है कि यूपी से राज्यसभा के 31 सदस्यों में से 10 का कार्यकाल नंवबर माह में पूरा हो रहा है। इनमें छह बसपा, एक सपा, एक भाजपा और दो निर्दलीय हैं। विधायकों की संख्या से हिसाब से इस बार बसपा अपने छह सदस्यों को राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं है। इस बार बाजी सपा के हाथ में रहेगी। सपा आसानी से छह सदस्यों को राज्यसभा में भेजने की स्थिति में है। ऐसी स्थिति में अमर सिंह इस जुगाड़ में हैं कि वह अपने साथ-साथ जयाप्रदा के लिए भी जगह बना लें।
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सपा से निकाले गए थे अमर और जया

लोकसभा चुनाव में अमर सिंह फतेहपुर सीकरी से व जयप्रदा को बिजनौर संसदीय सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा है। दोनों को राजनीतिक संजीवनी की तलाश है। अमर सिंह 2008 में सपा से राज्यसभा में गए थे। पार्टी ने 2010 में उन्हें रामपुर की तत्कालीन सांसद जयाप्रदा के साथ बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अमर सिंह एक बार फिर से राज्यसभा में जाने को इच्छुक हैं। वह फिलहाल रालोद में हैं, रालोद इस स्थिति में नहीं है कि किसी को राज्यसभा में भेज सके। रालोद मुखिया अजित सिंह खुद कांग्रेस व अन्य दलों के सहयोग से राज्यसभा में जाने की कोशिश में लगे हैं। ऐसी स्थिति में अमर सिंह ने सपा मुखिया मुलायम सिंह के साथ नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी हैं। लगभग साढ़े चार साल के बाद मंगलवार को लखनऊ में दोनों एक मंच पर नजर आए।

राजनीतिक गलियारों में तो यह चर्चा है कि अमर सिंह की घर वापसी हो सकती है, लेकिन इस राह में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खां होंगे। आजम खां, अमर सिंह के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। वह अमर सिंह की सपा में वापसी या राज्यसभा में भेजने का खुलकर विरोध कर सकते हैं। फिलहाल इस समस्या का हल सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ही निकाल सकते हैं। लेकिन एक बात तय है कि नवंबर तक प्रदेश की राजनीति में कुछ न कुछ बदलाव आएगा।
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नवंबर 2014 में इनका कार्यकाल होगा समाप्त

प्रो. रामगोपाल यादव (सपा)
अखिलेश दास गुप्ता (बीएसपी)
अवतार सिंह करीमपुर (बीएसपी)
बृजलाल खाबरी (बीएसपी)
कुसुम राय (भाजपा)
अमर सिंह (निर्दलीय)
ब्रजेश पाठक (बसपा)
राजाराम   (बसपा)
वीर सिंह (बसपा)
मोहम्मद अदीब (निर्दलीय)
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