22 मई 2009 को सत्ता पर काबिज हुई यूपीए-2 सरकार के पिछले चार साल में छह विकेट गिर चुके हैं। गत चार वर्षों में कई मौकों पर ऐसे हालात पैदा हुए कि केंद्रीय मंत्रियों को अपने इस्तीफे सौंपने पड़े।
ए राजा (दूरसंचार मंत्री)
टेलीकॉम घोटालों में फंसे डीएमके के मंत्री ए राजा को सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद अपनी कुर्सी छोडऩी पड़ी थी। इसके कुछ समय पश्चात ही केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन को भी अपने ओहदे से हाथ धोना पड़ा।
शशि थरूर (विदेश राज्य मंत्री)
दयानिधि मारन का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि आईपीएल विवाद में फंसे एक और केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को भी कुर्सी छोडऩी पड़ी। थरूर यूपीए-2 में कुर्सी से इस्तीफा देने वाले पहले मंत्री थे।
वीरभद्र सिंह (लघु एवं उद्योग मंत्री)
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हिमाचल से केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह को इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि बाद में उनको शिमला की एक अदालत ने क्लीन चिट दे दी थी। उन पर सीडी कांड के भी आरोप लगे थे।
सुबोधकांत सहाय (पर्यटन मंत्री)
इसके बाद कोयला घोटाले में फंसे कांग्रेस के एक और मंत्री सुबोधकांत सहाय को अपनी गद्दी छोडऩी पड़ी। सुबोध कुर्सी गवांने वाले तीसरे कांग्रेसी मंत्री थे।
पवन बंसल (रेल मंत्री)
रेल मंत्री पवन बंसल पिछले हफ्ते ही अपने भांजे के द्वारा रेलवे विभाग में प्रमोशन घूसकांड में फंसे। इस पूरे मामले में चली लंबी सियासी खींचतान के बाद शुक्रवार शाम बंसल ने इस्तीफा दे दिया।
अश्वनी कुमार (कानून मंत्री)
पिछले एक महीने से कांग्रेस के दो मंत्रियों कानून मंत्री अश्वनी कुमार और रेल मंत्री पवन बंसल पर तलवार लटकी हुई थी। इसमें अश्वनी कुमार का मामला ज्यादा पुराना है क्योंकि अश्वनी कुमार पर पिछले महीने सीबीआई के निदेशक से मुलाकात करके कोयला घोटाले की ड्राफ्ट रिपोर्ट बदलवाने का आरोप लगा था। आखिरकार अश्वनी कुमार को इस्तीफा देना पड़ा।