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'प्रधानमंत्री मोदी को विज्ञान के बारे में कौन बताएगा?'

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प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य प्रो. एसई हसनैन ने केंद्र सरकार की ओर से विज्ञान को आगे नहीं बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद का गठन नहीं किया गया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री को विज्ञान की स्थितियों और वैज्ञानिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ही नहीं दी जा रही है।
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आईवीआरआई के 126वें स्थापना दिवस समारोह में आए प्रो. एसई हसनैन ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि विदेशी तकनीक को भारत लाने या यहां पर सिर्फ एसेंबल करने से काम नहीं चलेगा। भारत को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी तकनीक विकसित करनी होंगी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी बहुत जुझारू, एक्टिव और हार्ड वर्कर प्रधानमंत्री हैं।

संघ भी एक राष्ट्रवादी संगठन है। वह भारत में विज्ञान को आगे बढ़ाकर उसे दूसरे देशों से आगे ले जाने की सलाह क्यों नहीं दे रहा है? पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री अपनी वैज्ञानिक सलाहकार परिषद को बहुत समय देते थे। वैज्ञानिक उन्हें प्रस्ताव बनाकर भेजते थे, जिन्हें बाद में लागू किया जाता था। पहले देश में सिर्फ छह आईआईटी थे।
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'यूजीसी के बजट में भी कटौती की गई'

प्रस्ताव देने के बाद 16 आईआईटी खुल गए और नए-नए शोध संस्थान भी खोले गए। उन्होंने कहा कि अब विज्ञान के पचास फीसदी बजट में कटौती की गई है। यूजीसी के बजट में भी कटौती की गई है। नए प्रोजेक्ट नहीं मिल रहे हैं।

आईसीएमआर ने तो अधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है कि बजट की कमी के चलते कोई भी नया प्रोजेक्ट नहीं दिया जा सकता, इसलिए शोध रुक गए हैं। प्रो. हसनैन ने कहा कि हमने पिछले साठ सालों में विज्ञान के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल कीं, उस पर ही हमें विदेशों में भी सम्मान मिलने लगा है। हमें स्पेस तकनीक नहीं दी गई तो हमने उसे विकसित कर लिया। हमें एटॉमिक तकनीक देने से मना किया गया तो हमने उसे भी विकसित कर लिया।

विदेशों में हमारी धाक विज्ञान पर प्रगति करने से ही बनेगी और विज्ञान के बिना नई तकनीकें संभव ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी किया यह सच है कि पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से कोई डरता नहीं था। अब अधिकारी और कर्मचारी सब डरते हैं। इससे लोग ईमानदारी से काम करने लगे हैं, लेकिन इस भय को सकारात्मक दिशा में बढ़ाने की जरूरत है।
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