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रिजल्ट देने वालों को मिलेगी संसदीय समितियों की कमान

Sun, 08 Jun 2014 05:09 PM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोदी सरकार की तरह अब संसदीय स्थायी समितियों की कमान रिजल्ट देने वाले नेताओं को सौंपी जा सकती है। सुमित्रा महाजन के लोकसभा स्पीकर चुने जाने के बाद अब संसदीय समितियां गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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जल्दी ही आवास समिति गठित होगी। यह समिति ही सांसदों को दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराएगी। लोकसभा में भाजपा के सबसे ज्यादा सांसद हैं इसलिए सबसे ज्यादा संसदीय समितियों की कमान भाजपा के हिस्से आएगी।

जबकि कांग्रेस संसदीय समितियों में भी बहुत कम दिखेगी। यहां तक कि विपक्ष के पास रहने वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) का चेयरमैन पद कांग्रेस को मिलने के आसार बहुत कम हैं।
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संसदीय समितियों में भी कांग्रेस पीछे

सूत्रों के अनुसार यह पद अन्नाद्रमुक, बीजेडी या तृणमूल कांग्रेस को देने पर विचार चल रहा है। नई लोकसभा गठित होने के बाद अब मंत्रालयों से संबंधित 24 स्थायी संसदीय समितियों समेत अन्य समितियों का गठन होना है।

मंत्रियों को छोड़कर बाकी सभी सांसद किसी न किसी संसदीय समिति के सदस्य होते हैं। इन 24 स्थायी संयुक्त समितियों में से 16 के चेयरमैन लोकसभा और आठ के चेयरमैन राज्यसभा से होते हैं। इन समितियों में पार्टियों के सदस्यों की संख्या के अनुपात में उन्हें शामिल किया जाता है। इसलिए सबसे ज्यादा कमान भाजपा के खाते में आना तय है।

बीजेपी को लगभग 11 समितियों की कमान मिल सकती है, जबकि कांग्रेस को मात्र तीन। पिछली बार कांग्रेस के पास 10 संसदीय समितियां थीं।

इनके अलावा अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी, शिवसेना, टीडीपी को भी कम के कम एक समिति की कमान मिलेगी। माकपा और वाईएसआर कांग्रेस को एक-एक समिति मिलने की संभावना है। सपा, बसपा, डीएमके को एक भी समिति की कमान मिलने के आसार नहीं हैं।
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संसदीय समितियों पर एक नजर

संसद में तीन तरह की समितियां हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर और भी समितियां गठित हो सकती हैं।

1- वित्त संबंधी समितियां- इनमें प्राक्कलन समिति, लोक लेखा समिति और केंद्रीय उपक्रम समिति

2- मंत्रालय संबंधी संयुक्त संसदीय स्थायी समितियां- मंत्रालयों से संबंधित कुल 24 स्थायी संसदीय समितियां हैं, इनमें से 16 के लिए लोकसभा और आठ के लिए राज्यसभा से अध्यक्ष मनोनीत किए जाने हैं। वाणिज्य, गृह, विदेश, मानव संसाधन, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परिवार कल्याण, कार्मिक, लोक शिकायत मामले, कृषि, न्याय और कानून, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, रेलवे, खाद्य और उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण, श्रम, पेट्रोलियम, जल संसाधन, वित्त, रसायन और उर्वरक, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय और अधिकारिता, परिवहन, पर्यटन और संस्कृति, कोयला व स्टील, शहरी विकास आदि हैं।

3- अन्य संसदीय समितियां- इनमें आवास समिति, विशेषाधिकार हनन समिति जैसी प्रमुख समितियां होती हैं।

4- एड हॉक समितियां- संसद में कई एड हॉक समितियां भी गठित की जाती हैं। जरूरत पड़ने पर किसी जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भी गठित की जाती रही हैं।
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